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नागौद में इन दिनों अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद, प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल…?

नागौद जबलपुर दर्पण । बता दे इन दिनों नागौद में शासकीय भूमियों पर भू माफियाओ की सीधी नजर , भू माफिया शासकीय भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा कर रहे है वहीं प्रशासन भू माफियाओ पर प्रशासन को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे है नागौद के कई वेश कीमती जमीनों पर भू माफियाओ का कब्जा हो रहा प्रशासन मौन नजर आ रहा अगर कोई प्रशासनिक अमले को अवगत भी करवाता है तो प्रशासनिक अधिकारी लिखित शिकायत की बात कह कर टाल मटोल करते नज़र आते है सूत्रों की माने तो इन कब्जों में नगर परिषद के कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध नज़र आ रही है
अतिक्रमण नंबर 1:- नागौद बस स्टैंड के पास करोड़ रु की विपरण की शासकीय जमीन अतिक्रमण कर पक्का निर्माण हो रहा ,राजस्व और नगर परिषद के कर्मचारी और अधिकारी अब जानते हुए पहले बने रहे मौन
ख़बर के बाद आखिर न चाहते हुए भी कुंभकर्णी नीद से जागा प्रशासन मौके पर पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार बंटन की पाई गई जमीन, निर्माण पर लगाया रोक मगर जो कहानी यहां सामने आई उसमें नगर पालिका ने बंटन की जमीन पर नामांतरण कर दिया है, जो पूरी तरह है नियम विरुद्ध है। हालांकि एसडीएम और तहसीलदार ने की जांच की बात अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच की आंच कहा तक पहुंचती है या सिर्फ ठंडे बस्ते के ही दम तोड़ती है ।

अतिक्रमण नंबर 2:- वहीं दूसरी ओर नगर परिषद खुद की बिल्डिंग बनाने के लिए भूमि तलाश करता नजर जबकि उनके वर्तमान कार्यालय के पीछे लगभग 4000st भूमि नगर परिषद से लगी बेस कीमती भूमि पर अतिक्रमणकरियों ने कर लिया कब्जा जिसे खाली करने में नगर परिषद के छूट रहे पसीने , यहां तो यही कहावत परिचार्थ नजर आ रही की दिया तले अंधेरा

अतिक्रमण नंबर 3:- नागौद नगर परिषद से महज 100 कदम दूर कॉपरेटिव बैंक के बगल से करोड़ की भूमि पर बन गई बिल्डिंग नगर परिषद शिकायतों के बाद भी बनी रही मूकदर्शक आख़िर किसके सह पर हुआ कब्ज़ा बड़ा सवाल , सीएम हेल्प लाइन से लेकर लिखित में हुई शिकायत मगर आलम अंधेर नगरी चौपट राजा वाला जानते हुए भी सब बने मौन क्या प्रशासनिक अमले की सहभागिता से चल रहे पूरे शहर में अतिक्रमण अब देखना होगा ख़बर के बाद क्या कदम उठाएंगा प्रशासनिक अमला…?

अतिक्रमण नंबर 4:- नगर परिषद के अंतिम छोर जसों रोड में मुक्तिधाम के पास रोड ले लगी बेस कीमती भूमि देखते देखते अतिक्रमणकरियों ने कब्ज़ा कर लिया मगर प्रशासन ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया आखिर क्यों क्या प्रशासनिक अमले में ही किसी ने करवाया कब्जा जांच का विषय यह है वही बात करे तो यह भूमि बीड़ी श्रमिकों को आवंटित की गई थी उसमें भी सिर्फ 15 ही नाम सम्मिलित थे मगर आज वहां 100 घर बन गए आखिर किसने दी मंजूरी बड़ा सवाल वही आखिर किसने किया बेशकीमती जमीन का बंदरबाट क्या प्रशासनिक अमला शासकीय भूमि को खाली करवाने के दिखाएगा दिलचपस्पी या धृतराष्ट्र बना सब देखते समझते हुए भी बना रहेगा अंजान…?

अब देखना यह है कि खबरों के बाद कब तक अपनी नींद से जागता है प्रशासनिक अमला, सूत्रों की माने तो नागौद का एक बड़ा जत्था इन मामलों की शिकायतों को लेकर नगर परिषद और नागौद प्रशासनिक अधिकारियों की शिकायत को लेकर सतना कलेक्टर से मिलने पहुंचने के आधार..?

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