एक सप्ताह से अंधेरे में डूबा सिमरिया, जला ट्रांसफॉर्मर; बिजली विभाग पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप

मझौली जबलपुर दर्पण । मझौली विद्युत वितरण केंद्र की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग में बिना पैसे दिए कई कार्य समय पर नहीं किए जाते। किसानों का यह भी कहना है कि 5 एचपी पंप कनेक्शन जैसी योजनाओं में भी अवैध रूप से पैसे मांगे जाते हैं, जबकि शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ नियमों के तहत मिलना चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी बीच मझौली तहसील की ग्राम पंचायत छीतापाल के ग्राम सिमरिया में पिछले एक सप्ताह से मुख्य ट्रांसफॉर्मर जल जाने के कारण पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली न होने से ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली आपूर्ति ठप होने से पेयजल संकट गहरा गया है। रात में अंधेरा रहने से जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और बुजुर्गों सहित बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफॉर्मर जलने की सूचना तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी न तो नया ट्रांसफॉर्मर लगाया गया और न ही बिजली आपूर्ति बहाल की गई। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम सिमरिया में तत्काल नया ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति शुरू की जाए। साथ ही बिजली विभाग में कथित भ्रष्टाचार और किसानों से अवैध वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 से 48 घंटे के भीतर



