जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

संस्कारधानी में ऐतेहासिक कजलियां महोत्सव सम्पन्न

जबलपुर दर्पण। भारतीय त्यौहार सामाजिक सहिष्णुता और समरसता के प्रतीक हैं। इन पर्वो के आयोजन पर सभी जाति, वर्ग और समाज के लोग आपस में जुड़कर आपसी एकता का संचार करते हैं। कजलियां महापर्व भी इसी परंपरा से ओतप्रोत है, जिसमें समन्वय, सद्भाव व सरसता की सामाजिक खुशबू है। ये खुशबू हमारे मन-बुद्धि में फैलकर वृहद रूप से राष्ट्रीय एकता की माला बन कर भारत माता के गले का मंगलाहार बनती है। तदाशय के भाव-उद्गार संस्कारधानी में सामाजिक समरसता संगठन की संयोजना में पहली बार वृहद रूप से मनाए गए ‘कजलियां महा महोत्सव’ में आमंत्रित संत जनों ने व्यक्त किए। स्थानीय बंगाली क्लब के विशाल प्रांगण में आयोजित इस भव्य-दिव्य एवं गरिमामय समारोह की संयोजना पर संतों-महंतों सहित संस्कारधानी के प्रबुद्धजनों ने शुभकामनाएं दीं।

सामाजिक समरसता संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने कार्यक्रम का उद्देश्य और संयोजना पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक समरसता की विषय वस्तु आगंतुकों के समक्ष रखी उन्होंने कहा सब सबको जाने – सब सबको माने के अभियान को लेकर समरस और समर्थ भारत बनाने के उद्देश्य से समरसता सेवा संगठन का गठन किया गया है। सर्व समाज को एकसूत्र में पिरोते हुए हमारे संतो, आराध्यों और महापुरुषों के विचार, दर्शन और समाज कल्याण के संदेश सभी लोगो तक पहुँचे और हमारे आराध्य, संतो, महापुरुषों को केवल अपनी अपनी जाति समाज तक ही सीमित न किया जाए इस हेतु उनकी जयंती पर विचार गोष्ठी और सम्मान कार्यक्रम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा हमारा देश में पर्वो को उत्सव के रूप मनाया जाता रहा है यह पर्व ही समरसता के भाव को जागृत करने और अपनी संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का कार्य करते है इनमें से ही एक पर्व कजलियां पर्व है जिसमे लोग आपसी मेलजोल की भावना को बढ़ाते हैं और आपसी सद्भाव एवं समरसता के प्रति आदर रखने की भावना को प्रबल करते हैं और समाज के लोगों में प्रेम, उल्लास और आनन्द का संचार होता है। कजलियां तो यूं भी आपसी मेल और मनुआर का प्रतीक है, जिसके बहाने लोग एक दूसरे के दुख-सुख में शरीक होकर आपसी निष्ठा का परिचय देते हैं। कजलियां से एक दूसरे के प्रति समर्पण की भावना पैदा होती है, जो समाज में नैतिकता के उच्च मानदण्ड स्थापित करने में सहायक हैं इसीलिए संस्कारधानी समरसता कजलियां महोत्सव का आयोजन किया गया है जिसमे पूज्य संतजनों का आशीर्वाद और सभी समाज के प्रतिनिधियों का सानिध्य प्राप्त हुआ इसके लिए कृतज्ञता अर्पित करता हूँ।

कजलियां महा महोत्सव में सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघवदेवाचार्यजी, महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद जी, नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. नरसिंहदास जी, गुप्तेश्वरपीठाधीश्वर डॉ मुकुंददासजी, बगलामुखी पीठ के ब्रम्हचारी चैतन्यानंद जी, महंत डॉ राधेचैतन्य जी, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी जी, मुम्बई से पधारी किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी, साध्वी संपूर्णा जी, पूज्य पाद निर्विकल्पनन्द सहित अनेक संतवृंद महंत ने उपस्थित होकर अपना आशीर्वाद दिया।संतजनों ने दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम की शुरुआत की जिसके बाद नगर पंडित सभा के पं वासुदेव शास्त्री, पं रोहित दुबे एवँ आचार्य गणो द्वारा स्वस्तिवाचन किया गया।

75 से अधिक सामजिक, व्यापारी संगठनों की सहभागिता –संस्कारधानी के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर मनाए गए कजलियां महा महोत्सव में संस्कारधानी के 75 से अधिक सामाजिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक संस्थाओं की सहभागिता रही। जिन्होंने मंच पर पूज्य संतो का आशीर्वाद लेते हुए उनसे कजलियां प्राप्त की।

संतवृन्द सहित उपस्थित सामजिक जनो ने कजलियां देकर मनाया उत्सव-आयोजन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने सामाजिक समरसता संगठन के ही नागपंचमी आयोजन में वितरित कजलियां पात्र में बोई गई कजलियां लेकर उपस्थित हुए। जिनकी पूजन के उपरांत सर्वप्रथम मंच पर सभी संतो ने कजलियों का। आदान प्रदान किया उसके बाद सभी ने एक दूसरे को कजलियोंं का आदान-प्रदान कर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

कजलियां भोज का अनूठा जायका –कजलियां महा महोत्सव में पारंपरिक स्वादिष्ट और जायकेदार खान-पान की भी धूम रही। इस धूम में भी सामाजिक सहभागिता रही। आयोजन में सिंधी समाज द्वारा दाल पकवान, पंजाबी समाज द्वारा राजमा चावल, गुजराती समाज द्वारा ढोकला, जैन समाज द्वारा जलेबी, श्वेतांबर जैन समाज द्वारा पानी, केसरवानी समाज द्वारा कॉर्न चाट, ताम्रकार समाज द्वारा चुरी बेर, माहेश्वरी समाज द्वारा राजगिर लड्डू , सिख समाज द्वारा द्वारा चाय, मुकादम गंज व्यापारी संघ द्वारा चना मसाला सहित अन्य व्यंजन परोसे गए। बंगाली समाज द्वारा आयोजन स्थल उपलबध कराया गया। यहाँ तक कि कार्यक्रम की पार्किंग में समरसता का भाव नजर आया जिसमे मुस्लिम समाज द्वारा पार्किंग हेतु स्थान उपलब्ध कराया गया तो सिख समाज द्वारा पार्किंग व्यवस्था में सहयोग किया गया।

गूंजी, कजरी, आल्हा, लोकगीत की स्वर लहरियां-कार्यक्रम में मां नर्मदा पर आधारित नृत्य नाटिका, कजरी, आल्हा, लोकगीत सहित पारंपरिक नृत्य की मोनमोहनी प्रस्तुति दी गई। देवी गुण गायक मिठाई लाल चक्रवर्ती एवँ भजन गायक रवि शुक्ला के भजनों ने उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बच्चों-महिलाओं की सहभगिता हेतु हुई प्रतियोगिता –इस अवसर पर बच्चों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। जिसमे 12 से 18 वर्ष तक के बच्चे ‘कजलियों से समरसता’ विषय पर अधिकतम 300 शब्दों में लिखकर लाए गए निबंध कार्यक्रम स्थल पर जमा किए गए। वहीं महिलाओं के लिए ‘पूजा थाली सजाओ प्रतियोगिता’ का सफल आयोजन किया गया। ये थालियां भी कार्यक्रम स्थल पर जमा हुई। आयोजन समिति द्वारा बताया गया कि उक्त दोनों प्रतियोगिताओं के 10-10 चयनित प्रतिभागियों को आगामी 6 सितम्बर आयोजित ‘बलराम जयंती’ पर नगद धनराशि के साथ पुरस्कृत किया जाएगा।

चाइल्ड जोन का बाल आनंद –इस अनूठे ‘कजलियां महोत्सव’ में बच्चे-बड़े, महिला-पुरुष सबकी सहभागिता रही। आयोजन संस्कारधानी की शास्वत एवं गौरवशाली परंपरा के अनुरूप हुआ। आयोजन स्थल पर बच्चों के लिए बने ‘चाइल्ड जोन’ की संयोजना में भगवत स्वरूप बााल आनंद की छटा देखते ही बन रही थी। बच्चों के पसंदीदा झूलों ने उन्हें खूब आकषित किया तो वहीं पारंपरिक जायकेदार व्यंजनों की खुशबू बड़ों को लुभाती रही। कार्यक्रम का संचालन आलोक पाठक एवँ अखिल मिश्र ने और आभार प्रदर्शन सचिव उज्जवल पचौरी ने व्यक्त किया।

इनकी रही उपस्थिति –आयोजन में पूर्व साँसद श्रीमती जयश्री बैनर्जी, विधायक अशोक रोहाणी, विधायक विनय सक्सेना, मप्र पर्यटन विकास निगम अध्यक्ष पं विनोद गोंटिया, मप्र जनअभियान परिषद उपाध्यक्ष डॉ जितेंद्र जामदार, भाजपा प्रदेश मंत्री आशीष दुबे, नगर अध्यक्ष प्रभात साहू, पूर्व विधायक शरद जैन, पूर्व विधायक एवँ भाजपा प्रत्याशी अंचल सोनकर, बरगी प्रत्याशी नीरज सिंह, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज, कमलेश अग्रवाल, जीएस ठाकुर, अभिलाष पांडे, दीपांकर बैनर्जी, धीरज पटेरिया, राकेश सैनी, लक्ष्मी बेन, पार्षद अयोध्या तिवारी, सहित शहर के प्रबुद्धजन, सभी समाजों के प्रतिनिधि, महिलाएं एवँ युवा वर्ग शामिल उपस्थित थे।

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