भीषण गर्मी से जनजीवन और वन्यजीव दोनों प्रभावित, संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

जबलपुर दर्पण । प्रदेश सहित पूरे देश में पड़ रही भीषण और जानलेवा गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के चलते आम नागरिकों के साथ-साथ पालतू जानवरों और वन्य जीवों का जीवन भी संकट में आ गया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा है कि जंगलों में पानी और भोजन की कमी के कारण वन्य जीव अब शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे कई बार मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है। इस संबंध में अल्पसंख्यक कांग्रेस परिवार के वरिष्ठ नेता सरदार दलबीर सिंह जस्सल और सुमन कुमार जैन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बढ़ती गर्मी, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के असंतुलन के कारण वन्य जीवन गंभीर संकट से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति मानव गतिविधियों और पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम है। नेताओं ने कहा कि हाल ही में कान्हा टाइगर रिजर्व से आई कुछ घटनाएँ चिंता बढ़ाने वाली हैं। जहां एक बाघिन के शावकों की स्थिति को लेकर पहले सकारात्मक जानकारी सामने आई थी, वहीं बाद में कुछ शावकों की मृत्यु की खबर ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों में संक्रमण, पानी में डूबने और भूख को कारण बताया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संरक्षित वन क्षेत्रों में भी ऐसी परिस्थितियाँ बन रही हैं तो यह केवल संयोग नहीं बल्कि प्रबंधन और पर्यावरणीय व्यवस्था पर गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि आज जंगलों में बारहमासी जल स्रोतों की कमी, शिकार और प्राकृतिक भोजन की अनुपलब्धता जैसे कारण वन्य जीवों के अस्तित्व को प्रभावित कर रहे हैं। सामाजिक नेताओं ने यह भी कहा कि भीषण गर्मी में वन्य प्राणी कमजोर होकर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और भोजन-पानी की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आ रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग से मांग की है कि वन क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण, कृत्रिम जल व्यवस्था, भोजन की उपलब्धता और आधुनिक संरक्षण उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि वन्य जीवन और मानव जीवन दोनों सुरक्षित रह सकें।



