जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

प्रदेश के शासकीय स्कूल खेल प्रषिक्षकों(कोचों) से वंचित

रोजगार के अभाव में बी.पी.एड और एम.पी.एड प्रषिक्षित छात्र हो गये बेरोजगार

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेष जागरूक खेल संघ के जिलाध्यक्ष राॅबर्ट मार्टिन ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि प्रदेष में ऐसे सैंकड़ो माध्यमिक शालाओं के साथ ही हाई स्कूल और हायर सेकेन्ड्री स्कूलों में व्यायाम निर्देषक(खेल कोचों) के पद खाली पड़े है जिसके लिए शासन-प्रषासन के साथ ही स्कूल षिक्षा विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है फल स्वरूप खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए जिन बी.पी.एड और एम.पी.एड प्रषिक्षकों की आवष्यकता होती है, वे अपनी डिग्री हांहिल कर बेरोजगार घूम रहे हैं। जब शालाओं में व्यायाम निर्देषक ही नहीं रहेंगे तो फिर स्कूलों से खेल प्रतिभांए कैसे आगे आंयेगी और कैसे मध्य प्रदेष स्कूल स्तर पर खेल प्रदर्षन को सुधार पाएगा। यही वजह है कि मध्य प्रदेष अन्य प्रदेषों की अपेक्षा खेलों में पिछड़ता जा रहा है। जिससे खेल प्रेमियों में रोष व्याप्त है। संघ आगे बताया कि प्रदेष के लगभग 70 प्रतिषत स्कूल खेल प्रषिक्षकों के अभाव में चल रहे हैं जहां एक ओर स्कूल स्तर पर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे वहीं प्रदेष में सैंकड़ो ऐसे छात्र जिन्होने बी.पी.एड एवं एम.पी.एड की डिग्री हांसिल की है वो नौकरी की तलाष में बेरोजगार यहां वहां भटकने मजबूर हैं वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेष शासन द्वारा षिक्षा विभाग में षिक्षकों की विषयवार नई नियुक्ति तो की जा रही है परंतु खेल विद्याओं की अनदेखी की जा रही है इसलिए डिग्री प्राप्त खिलाड़ी बेरोजगार घूमने मजबूर हैं वहीं स्कूल स्तर पर खेल प्रतिभाएं भी नहीं निकल पा रही हैं फलस्वरूप अन्य प्रदेषों की अपेक्षा मध्य प्रदेष विभिन्न खेलों में पिछड़ते जा रहा है। जबकि स्कूल समय विभाग चक्र में खेल प्रत्येक दिन खेल का पीरियड होता है किन्तु बिना व्यायाम निर्देषकों के बच्चे मैदान में यहां वहां घूमते नजर आते है। संघ ने बताया कि स्कूल स्तर पर सबजूनियर, जूनियर और सीनियर तीन ग्रूपों में प्रतिस्पर्धाएं होती हैं अर्थात सबजूनियर बच्चे माध्यमिक शालाओं से, जूनियर बच्चे हाई स्कूल से और सीनियर केटेगिरी के बच्चे हायर सेकेन्ड्री स्कूलों से निकलते हैं अर्थात माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेन्ड्री स्कूलों में तीनों स्तरों पर खेल प्रषिक्षक की आवष्यकता है परंतु प्रदेष में 70 प्रतिषत स्कूलो में खेल प्रषिक्षक नहीं हैं अर्थात पद खाली पड़े हैं और जो पहले से पदस्थ हैं वे सभी धीरे धीरे सेवानिवृत्त हो रहे है। ऐसे में प्रदेष शासन और स्कूल षिक्षा विभाग को इस ओर कदम बड़ाना चाहिए और स्कूलों में व्यायाम निर्देषकों की नई भर्ती की जाना चाहिए जिससे डिग्री प्राप्त छात्रों को रोजगार मिलेगा और विद्यार्थियों को प्रषिक्षक जिससे खेल प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी एवं प्रदेष का नाम रोषन करेंगी। संघ के जिलाध्यक्ष राॅबर्ट मार्टिन, राकेष श्रीवास, दिनेष गौंड़, स्टेनली नाॅबर्ट, हेमन्त ठाकरे, धनराज पिल्ले, राजकुमार यादव, सुधीर अवधिया, मधुमिता हाजरा, पूनम कुंड्डे, ओंकार दुबे, शषि रमन स्वामी, आषाराम झारिया, अजय मिश्रा, गुडविन चाल्र्स, सुधीर अवधिया, आर.पी.खनाल, रऊफ खान, एनोस विक्टर, गोपीषाह, फिलिप अन्थोनी, वसुमुद्दीन, राॅबर्ट फ्रांसिस, क्रिस्टोफर नरोन्हा, राजेष सहारिया, एस. बी.रजक, अनूप डाहट, निलेष खरे, अषोक परस्ते, आदि ने मुख्य मंत्री महोद्य से मांग की है कि प्रदेष के शासकीय स्कूलों में व्यायाम निर्देषकों की नई नियुक्ति की जाए।

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