10 सीटे नहीं दी गई तो विश्वकर्मा समाज विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेगा

जबलपुर दर्पण। यह कि विश्वकर्मा समाज मध्यप्रदेश में लगभग 55,00,000 ( पचपन लाख) की जनसंख्या में निवासरत् हैं, हिन्दुस्तान में विश्वकर्मा समाज की आबादी लगभग 14 से 18 करोड़ के बीच में है। स्वतंत्रता के पश्चात से ही हिन्दुस्तान में किसी भी राजनैतिक पार्टी के द्वारा विश्वकर्मा समाज को अपनी पार्टी में भागीदारी नहीं दी गई है, हमेशा यह समाज राजनैतिक पार्टियों के द्वारा उपेक्षित किया गया, जिसके कारण हमारा विश्वकर्मा समाज राजनैतिक क्षेत्र में किसी भी तरह की अपनी भागीदारी सुनिश्चित नहीं कर पाया है। मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी के द्वारा विश्वकर्मा समाज का फरवरी 2023 में “विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड” का गठन कराये जाने का झूठा आश्वासन दिया गया जो आज तक विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड का गठन नहीं कराया गया, जबकि वर्तमान समय में रजक, महाराणा, क्षत्रिय, कुशवाहा, साहू, आदिवासी, सोनी एवं अन्य समाज का कल्याण बोर्ड का गठन किया जा चुका है, इस तरह से यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी के द्वारा विश्वकर्मा समाज को उपेक्षित किया गया है, जो समाज को स्वीकार नहीं है। समाज के द्वारा सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि अब राजनैतिक पार्टीयों के द्वारा उपेक्षित निरंतर किया गया अब यह समाज द्वारा एकमतेन निर्णय लिया है कि म.प्र. के आगामी होने जा रहे विधानसभा चुनाव के निर्वाचन में जो भी राजनैतिक पार्टी विश्वकर्मा समाज को म.प्र. में विधानसभाओं की टिकट अपनी पार्टी से इस विश्वकर्मा समाज को प्रदान करेगी उसे विश्वकर्मा समाज संपूर्ण रूप से म.प्र. में अपना सहयोग एवं कीमती मत प्रदान करेगा, यदि राजनैतिक पार्टियों के द्वारा समाज को 10 विधान सभाओं की टिकटें प्रदान नहीं की जाती हैं तो विश्वकर्मा समाज के द्वारा चुनाव का बहिष्कार किया जावेगा, स्वतंत्रता के पश्चात से आज तक किसी भी राजनैतिक पार्टियों के द्वारा विश्वकर्मा समाज को जा तो निगम मंडल का अध्यक्ष न तो पिछड़ा वर्ग और न ही अन्य किसी महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया, हमेशा से यह समाज राजनैतिक पार्टियों के द्वारा अपने आपको अपमानित महसूस करता चला आ रहा है, लेकिन अब यह समाज किसी भी राजनैतिक दल या पार्टी के प्रलोभन में ना आकर आगे किसी भी तरह का अपमान सहन नहीं करेगा। जितनी हमारी संख्या है, उतनी भागीदारी बनती है। जो समाज लेने के लिए एवं अपने अधिकार के लिए सतत् प्रयास करेगा।



