माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन हेतुनालों के गंदे पानी से खेती पर लगा प्रतिबंध

जबलपुर दर्पण । माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका क्र. 42936/2025 में दिए गए निर्देशों के पालन हेतु शहर के नालों के गंदे पानी से उगाई जा रही फसलों और सब्जियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी की गई है। गंदे पानी के उपयोग से जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी राघवेन्द्र सिंह के द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
हाईकोर्ट के कड़े निर्देश और प्रशासन की सख्ती-माननीय उच्च न्यायालय ने 14 जनवरी 2026 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दूषित जल का उपयोग न केवल खेती, बल्कि पेयजल और स्नान के लिए भी तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए। इसके साथ ही, प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक संस्थानों पर भी नकेल कसने के निर्देश दिए गए हैं। शहर के सीमांतर्गत नालों के दूषित जल से फसलों और सब्जियों की सिंचाई को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऐसे उद्योगों, फैक्ट्रियों और व्यावसायिक संस्थानों को चिन्हित किया जाएगा जो नालों में अनुपचारित गंदा पानी छोड़ रहे हैं। उन्हें अनिवार्य रूप से प्राइवेट एस.टी.पी. लगाने के निर्देश दिए जाएंगे ताकि पानी नालों में गिरने से पहले ही साफ हो सके।
संयुक्त जांच दल गठित- कलेक्टर द्वारा गठित समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो संयुक्त रूप से फील्ड पर उतरकर कार्रवाई करेंगे, जिसमें क्रमशः समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अध्यक्ष, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय अधिकारी को सदस्य सचिव एवं जिला उद्योग केन्द्र जबलपुर महाप्रबंधक, नगर निगम जबलपुर अधीक्षण यंत्री (सीवर/जल), नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी, कृषि विभाग जबलपुर उप संचालक, होर्टिकल्चर जबलपुर उपसंचालक, नगर निगम जबलपुर अतिक्रमण अधिकारी, संबंधित थाना प्रभारी जबलपुर को सदस्य बनाया गया है।



