राम राज्य की स्थापना राम के चरित्र को अपनाकर होगी – आचार्य अभिनेष

जबलपुर दर्पण। शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनो आरोग्य,दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में आयोजित श्री राम कथा के तृतीय दिवस पर आचार्य श्री अभिनेष जी ने भगवान श्री राम के जीवन का वर्णन करते हुए बताया कि रामजी का नाम जब हम सुनते है तो हमारे मन में मर्यादा पुरुष की छवि आ जाती है । मर्यादापुरूषोतम श्री राम कलयुग में जीने का आधार है। भगवान श्री राम को याद करते ही शांत मुख, कमल सामान नयन ,मन मोहनी मुस्कान, और एक ठहर से परिपूर्ण छवि सामने आ जाती है। हम बचपन में बच्चों में कृष्ण की छवि देखते है। लेकिन जब एक पुरुष की बात आती है तो हमे सब में एक राम चाहिये। राम जो आज्ञाकारी है कैकई माँ के वनवास देने पे भी उन्होंने कभी उनका अपमान नही किया। राम जो पत्नी प्रिये थे सीता जी के वनवास जाने के बाद भी पर स्त्री के बारे में नही सोचा। राम जो वचन के पालन करने वाले है जब उनके पिता द्वारा वचन दिया गया तो उन्होंने वनवास जाके भी उसे पूरा किया बिना अपने कष्ट का ध्यान रखते हुए। ऐसे राम की कल्पना करते ही मन प्रसन्न हो जाता है। इस कलयुग में जीवन का आधार सिर्फ राम कथा है। उन्होंने जग को सही और गलत समझाने के लिए सारे कष्ट खुद सहे। प्रजा के राजा बनकर सीता जी को वनवास दिया लेकिन सीता जी के पति होने की वजह से खुद राजमहल में वनवास का जीवन जीते रहे। मनुष्य के लिए रामजी हर मुश्किल का हल है। ये कहा भी जाता है कलयुग में तो कोई एक राम नाम भी ले ले तो उसका उद्धार निश्चित है।
उन्होंने साक्षात पूर्णब्रह्म परमात्मा होते हुए भी मित्रों के साथ मित्र जैसा, माता-पिता के साथ पुत्र जैसा, सीता जी के साथ पति जैसा, भाइयों के साथ भाई जैसा, सेवकों के साथ स्वामी जैसा, मुनि और ब्राह्मणों के साथ शिष्य जैसा, इसी प्रकार सबके साथ यथायोग्य त्यागयुक्त प्रेमपूर्ण व्यवहार किया है। अत: उनके प्रत्येक व्यवहार से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। श्री रामचंद्र जी के राज्य का तो कहना ही क्या, उसकी तो संसार में एक कहावत हो गई है। जहां कहीं सबसे बढ़कर सुंदर शासन होता है, वहां ‘रामराज्य’ की उपमा दी जाती है।
श्री राम के राज्य में प्राय: सभी मनुष्य परस्पर प्रेम करने वाले तथा नीति, धर्म, सदाचार और ईश्वर की भक्ति में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करने वाले थे। प्राय: सभी उदारचित्त और परोपकारी थे। वहां सभी पुरुष एकनारीव्रती और अधिकांश स्त्रियां धर्म का पालन करने वाली थीं। भगवान श्रीराम का इतना प्रभाव था कि उनके राज्य में मनुष्यों की तो बात ही क्या, पशु-पक्षी भी प्राय: परस्पर वैर भुलाकर निर्भय विचरा करते थे। भगवान श्रीराम के चरित्र बड़े ही प्रभावोत्पादक और अलौकिक थे।
यदि हमें रामराज्य की स्थापना करनी है तो राम के चरित्र और उनके गुणों को अपनाना होगा।
उपरोक्त बातें आचार्य श्री अभिनेष जी ने तीन दिवसीय राम कथा के समापन पर कही।
इस अवसर पर कथावाचक आचार्य श्री अभिनेष जी, श्रीमती सोनिया सिंह,श्रीमती अनिता पटेल सदस्य मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, रूपेश पिंटू पटेल नगर उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा, जय कुमार जैन,सतीश कुमार शिरवैइया, शांतम प्रज्ञा आश्रम के संचालक मुकेश कुमार सेन, संतोष अहिरवार,सुनील पटेल,चंचल गौतम,अजय सोनी एवं आश्रम में उपचार ले रहे मरीज उपस्थित रहे।



