संपादकीय/लेख/आलेख

दिल्ली में फिर पटरी पर दौड़ी शिक्षा

लगभग डेढ़ महीने के अवकाश के बाद दिल्ली के सभी विद्यालयों में शिक्षा संबंधी गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं। गौरतलब है कि 1अप्रैल ,2021 से शिक्षा का नया सत्र 2021- 22 शुरू हो चुका है।ज्ञात रहे कोरोना के चलते इस बार दिल्ली के सभी स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां अर्थात ग्रीष्म अवकाश अपनी नियत अवधि से पहले ही घोषित कर दिए गए थे प्रत्येक वर्ष ये अवकाश अमूमन मई के महीने में शुरू होते रहे हैं परंतु इस साल इन्हें अप्रैल के महीने से ही शुरू करने की घोषणा सरकार ने कर दी थी।10 जून से दिल्ली के सभी स्कूल विद्यार्थियों के लिए फिर से आरंभ हो गए हैं।पिछले साल की तरह इस साल भी इस सत्र की शुरुआत स्कूल की घंटी और छात्रों के हो – हल्ले के स्थान पर ऑनलाइन क्लास से शुरू हुई और शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों के अध्यापक अपनी-अपनी कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देंगे। शिक्षकों के पास शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अनेक प्रकार के विकल्प हैं जिनका प्रयोग कर वे बच्चों को उत्तम शिक्षण प्रदान कर सकते हैं और शिक्षा प्रणाली को सफल बनाने में अपना एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं ।सरकार के आदेश के अनुपालन में शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।विभाग के अनुसार दिल्ली के अधिकतर सभी स्कूलों में 50% शिक्षकों को स्कूल आना होगा।अर्थात अल्टरनेट डेज पर स्कूल अध्यापक स्कूल आएंगे और स्कूल से ही ऑनलाइन क्लास द्वारा बच्चों को शिक्षा प्रदान करेंगे जिस दिन वह घर पर होंगे घर से ही बच्चों की ऑनलाइन क्लास लेंगे ।स्कूल के प्रिंसिपल और बाकी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रतिदिन स्कूल आना अनिवार्य होगा।

शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार करने और शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को बच्चों के लिए बेहतर और आसान बनाने के लिए एनसीईआरटी ने भी नई-नई शिक्षा तकनीकों को इजाद किया है जिसके अंतर्गत ऑनलाइन क्लासेज का आयोजन तो होगा ही,साथ ही बच्चों को यूट्यूब पर अपलोड की गई शैक्षणिक वीडियोज के माध्यम से भी पढ़ाया जाएगा।दूरदर्शन पर भी विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर विशेष प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री के रूप में निशुल्क पुस्तक एवं कॉपी वितरण का भी खासा ख्याल रखा है ताकि प्रत्येक वर्ग के बच्चों को शिक्षा बिना किसी रूकावट के प्राप्त हो सके एवं कोरोना के चलते जो बच्चे ऑनलाइन क्लास अटेंड नहीं कर पा रहे हैं उन्हें भी कक्षा में नियमित रूप से आने के लिए प्रोत्साहन मिले।

किसी भी देश का भविष्य उस देश के छात्र तय करते हैं इसी बात को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने विद्यालयों में बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा प्रदान करने के लिए सभी अध्यापकों को निर्देशित किया है कि वे अधिक से अधिक मात्रा में रोचक व आकर्षक शिक्षण सहायक सामग्री (teaching aids)का निर्माण करें और ऑडियो और वीडियो के माध्यम से उन सहायक सामग्रियों का प्रयोग करके ही बच्चों को शिक्षण प्रदान करें जिससे बच्चों को अधिगम स्थाई रूप में प्राप्त हो सके और बच्चों की रुचि पढ़ाई में सतत निरंतर बनी रहे।

इसमें कोई शक नहीं कि सरकार अपने स्तर पर सभी वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए पूरी मेहनत से जुटी है ,परंतु यह भी सत्य है कि बहुत से बच्चों के पास आज भी ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक तकनीकी सामग्री जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप इत्यादि नहीं हैं जिसके अभाव में वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और पिछड़ जाते हैं। इस दिशा में भी सरकार को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है जिससे सभी बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त करने के समान अवसर प्राप्त हो सकें और हमारा देश शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर एक नई मिसाल कायम कर सके।

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