हाई कोर्ट बार के सभा कक्ष में गणेश प्रतिमा के समक्ष त्रिवेदी के डायरी नोट्स पर विचार विमर्श

जबलपुर दर्पण । मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सभा कक्ष में परंपरागत रूप से गणेश पर्वोत्सव के अवसर पर स्थापित विघ्नहर्ता भगवान गणेश की अलौकिक प्रतिमा के समक्ष सुप्रसिद्ध संविधानवेत्ता ब्रह्मलीन आदर्श मुनि त्रिवेदी जी के गणतन्त्र और गणतन्त्र के अधिष्ठाता भगवान गणपति पर लिखे डायरी नोट्स पर विचार विमर्श आयोजित किया गया है। यह विमर्श है परम्परा और आधुनिकता , आस्था और संविधान , देवत्व और नागरिकता के संदर्भ में है। ब्रह्मलीन आदर्श मुनि त्रिवेदी के डायरी नोट्स, जो एक सुप्रसिद्ध संविधानवेत्ता होने के साथ-साथ एक ऋषि-हृदय वैदिक साहित्य के उद्भट विद्वान भी थे।उनके नोट्स इस बात का साक्ष्य हैं कि गणतंत्र हमारे लिए कोई ‘बाहरी’ अवधारणा नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक चेतना में पहले से विद्यमान ‘गण’ की भावना का ही एक सुव्यवस्थित, संवैधानिक रूप है। यह स्मरण कराया कि हमारा गणतंत्र कोई पश्चिमी अवधारणा नहीं, बल्कि हमारी अपनी सनातन संस्कृति की ही देन है।



