जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

एम डी डी बाल भवन प्रांगन में हुआ साहित्यिक कार्यक्रम

नये युवा रचनकारो के लिए मन की उड़ान साहित्यिक मंच गठन जो करेगा वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान

जबलपुर दर्पण। एम डी डी बाल भवन करनाल के प्रांगन में जिले के साहित्य में रूचि रखने वाले युवाओं ने मन की उड़ान साहित्यिक मंच का गठन किया है जिसके संस्थापक रामेश्वर देव ने बताया कि मंच मासिक कार्यक्रम शाम -ए-ग़ज़ल व साहित्य क्षेत्र में बड़े आयोजन भी करवाएगा, जिसमें कविता, ग़ज़ल, मुक्त, लघु कथा व अन्य विधाओं का समावेश रहेगा, मंच का उद्देश्य करनाल शहरी व ग्रामीण आंचल के नव रचनाकारों, लेखकों को मंच प्रदान करने के साथ साथ करनाल के वरिष्ठ कवि/ साहित्यकार को सम्मान प्रदान करने का रहेगा।
मंच की पहली बैठक में कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें रामेश्वर देव को संस्थापक, गुलाब सिंह फक्कर को अध्यक्ष, सुषमा चौपड़ा को उपाध्यक्ष, संजोत सिंह को सचिव, मनोज मधुरभाषी को खजांची, महावीर मैहला व राजन गांधी को मीडिया प्रभारी, सत्या कोहंड व सुरेन्द्र कल्याण को सलाहकार, गुरमीत पाढा को समन्वय चुना गया।

तत्पश्चात् मंच के कार्यक्रम शाम -ए-ग़ज़ल की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि प्रेम पाल सागर व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम डी डी बाल भवन के संस्थापक को मंच द्वारा शाल व स्मृति चिन्ह भेंट सम्मानित किया। काव्य द्वारा की शुरुआत सरस्वती वंदना से कुमारी शैजल द्वारा की गई, वरिष्ठ कवि प्रेम पाल सागर ने कहा कि जीने के लिये शुद्ध वायु भरपूर होना चाहिए, बन्द यह प्रदूषण का नासूर होना चाहिए, मुख्य अतिथि पी.आर नाथ ने सभी को नये मंच की शुभकामनाएं दी और कहा कि भविष्य में यह मंच युवाओं के लिए प्रेरणा बने,रामेश्वर देव ने कहा कि इक अदब का कारवां देखो बनाया जाएगा, हर दिल में भाईचारे का गुल खिलाया जाएगा,गुलाब सिंह फक्कर ने कहा कि अभी जिद्द न कर ए जिंदगी, कभी फुर्सत में लिखेंगे तुझे भी,संजोत सिंह ने कहा कि किस्से बन जाएंगे कहानी एक दिन,राख हो जाएगी जवानी एक दिन, सुषमा चौपड़ा ने कहा कि जबसे तू ज़िंदगी में आया है,हमने तो प्यार ही प्यार पाया है, मनोज मधुरभाषी ने कहा कि जीने का तजुर्बा मैं जान गया हूं, ज़िंदगी का तजुर्बा मैं मान गया हूं, वरिष्ठ कवि कृष्ण निर्माण ने कहा कि फिकर म्हं नवे पुराने लोग,कोन्या गए पिछाने लोग,सत्या कोहंड ने कहा कि कंकर मोती कांटे फूल बगान क्या देखना, छोटा बड़ा व मुश्किल आसान क्या देखना,सुरेन्द्र कल्याण ने कहा कि वो मुझसे दूर रहकर खुश हैं, वो खुश हैं आम इसलिए ख़ुश हैं, गुरमीत पाढा ने कहा कि जिसने क़तरा भर भी साथ दिया हमारा, राजन गांधी ने कहा कि सोचा था कि तुम मेरे हो और मेरे ही रहोगे, राजपाल राजन ने कहा कि नुरानी ज्योत मोहब्बत की या तो जवानी नहीं, करमजीत सिंह ने कहा कि जो नज़र हो गये या छोड़ गये, इसके अलावा खुशबू रमेश कुमार, पंकज गहलोत, पारस गहलोत ने भी अपनी अपनी रचना प्रस्तुत की कार्यक्रम में गोपाल दास नीरू ,आयुषमान ,सजीव कुमार,दीपक कुमार व अन्य श्रोता उपस्थिति रहे।

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