पदोंन्नति नियमो की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं मे हुई सुनवाई आदेश सुरक्षित

जबलपुर दर्पण । मध्य प्रदेश सिविल सेवा पदोन्नति नियम 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की आज माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संजीव सचदेवा एवं जस्टिस श्री विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा अंतिम सुनवाई समय द्वारा की गईं। मुख्य रूप से मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सी.एस.बैद्यनाथण ने पक्ष रखा मध्य प्रदेश सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि पूर्व में जो आरक्षित वर्ग के कर्मचारी अधिकारी अनारक्षित में पदोन्नति पा चुके हैं उनकी गिनती आरक्षित वर्ग में की जाकर प्रोपोर्शनल रिजर्वेशन अर्थात अनुसूचित जाति को 16 परसेंट एवं अनुसूचित जनजाति को 20% प्रदान किया जाएगा ! अजाक्स संघ की एक पृथक से याचिका 03 अप्रेल 2025 को दायर की गई थी जिसमें पदोन्नति नियम के नियम 5 एवं 11 की संवैधानिकता को यह कहते हुए चुनौती दी गई थी कि उक्त नियम भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 से असंगत है ! उक्त में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट द्वारा कहा गया की याचिका नियम बनने के पूर्व दायर की गई है! तथा याचिका ख़ारिज कर दी ! अजाक्स संघ एवं हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं पुष्पेंद्र कुमार साह ने पक्ष रखा।



