जबलपुर दर्पण

माँ जगदम्बा की आराधना में भावविभोर हुई कल्पकथा की 241वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी

जबलपुर दर्पण। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि माँ आद्या शक्ति की आराधना एवं भक्ति भाव से अनुप्राणित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा आयोजित 241वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी “चैत्र नवरात्रि विशेष – आद्या शक्ति माँ जगदम्बा वंदना” विषय पर अत्यंत श्रद्धामय एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुई। इस भव्य साहित्यिक आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से जुड़े कवि-हृदयों ने अपनी सुमधुर एवं भक्तिरस से सराबोर काव्य प्रस्तुतियों द्वारा माँ भगवती की महिमा का अनुपम गुणगान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीवान बिहार के वरिष्ठ साहित्यकार बिनोद कुमार पाण्डेय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में तखतपुर, बिलासपुर छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रतिष्ठित साहित्यकार दिनेश कुमार दुबे की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मंगलमय शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे जी द्वारा गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना की संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने समूचे वातावरण को आध्यात्मिक आलोक से अभिसिंचित कर दिया। इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े साहित्यकारों नीलम अग्रवाल ‘रत्न’, विजय रघुनाथराव डांगे, अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’, किरण अग्रवाल, नन्द किशोर बहुखंडी, प्रेमलता कुमारी, ज्योति प्यासी, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, डॉ अंजू सेमवाल, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, दिनेश कुमार दुबे, बिनोद कुमार पाण्डेय, भास्कर सिंह माणिक, दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने अपनी भक्ति एवं श्रद्धा से ओतप्रोत रचनाओं द्वारा माँ जगदम्बा के विविध स्वरूपों का भावपूर्ण चित्रण किया। कार्यक्रम का सशक्त, संयोजित एवं प्रभावशाली संचालन श्री भास्कर सिंह माणिक जी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी सौम्य वाणी एवं साहित्यिक गरिमा से आयोजन को सतत प्रवाहमान बनाए रखा। इस काव्यगोष्ठी में दर्शक रूप में दुर्गादत्त मिश्र बाबा जी, सुजीत कुमार पाण्डेय, सुनील कुमार खुराना, श्रीमती कीर्ति त्यागी, श्रीमती ज्योति राघव सिंह, संदीप मारू गोठवाल, सांद्रा लुटावन गणेश एवं श्री प्रमोद पटले जी सहित अनेक साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही, जिनकी सराहना एवं सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक उन्नत किया। कार्यक्रम के समापन सत्र में दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा द्वारा भावपूर्ण आभार प्रदर्शन किया गया। तत्पश्चात “वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव वर्ष” के अंतर्गत समस्त उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” का गान किया गया। अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगलमय शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार ने यह संकल्प दोहराया कि साहित्य एवं भक्ति के इस दिव्य संगम के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं आध्यात्मिक चेतना का सतत संवर्धन करते हुए समाज को प्रेरित एवं जाग्रत करने का यह पावन अभियान निरंतर गतिशील रहेगा।

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