महाराणा प्रताप जयंती समारोह आयोजित, वीरता, स्वाभिमान और सामाजिक एकता का दिया संदेश

डिंडौरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। वीर शिरोमणि, राष्ट्र गौरव, स्वाभिमान, त्याग और अदम्य साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर राजपूत समाज द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्साह, गौरव, सामाजिक एकता और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में समाज के वरिष्ठजन, युवा वर्ग, छात्र-छात्राओं एवं बड़ी संख्या में समाज बंधुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान महाराणा प्रताप के आदर्शों, उनके संघर्षपूर्ण जीवन और राष्ट्रहित में किए गए त्याग को स्मरण करते हुए समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ हनुमान मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। समाज के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने भगवान हनुमान के समक्ष पूजा कर महाराणा प्रताप को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इसके पश्चात सभी समाजजन महाराणा प्रताप पब्लिक स्कूल पहुंचे, जहां आयोजित मुख्य समारोह में मंचासीन अतिथियों का तिलक लगाकर एवं माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया। विद्यालय परिसर में देशभक्ति और समाज एकता से जुड़े नारों के बीच समारोह का वातावरण पूरी तरह उत्साहपूर्ण बना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया गया। आयोजन स्थल पर सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन एवं उत्साह का परिचय दिया। समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. प्रताप सिंह चंदेल ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक शासक नहीं बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी अपने आत्मसम्मान और मातृभूमि के सम्मान से समझौता नहीं किया। उन्होंने समाज के लोगों से महाराणा प्रताप के आदर्शों को आत्मसात करने तथा सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर समाज के उत्थान के लिए संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया। इसके पश्चात डॉ. ओंकार सिंह चंदेल ने अपने उद्बोधन में महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष का मार्ग चुना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को शिक्षा, जागरूकता और संगठन के माध्यम से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक समरसता, भाईचारे और समाज कल्याण से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त किए। राजपूत समाज ब्लॉक अध्यक्ष जयसिंह राजपूत ने कहा कि समाज की प्रगति केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से सक्रिय सहभागिता की अपील करते हुए कहा कि संगठन ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने युवाओं को समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया तथा मेहनत, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन पर विशेष बल दिया। युवा समाजसेवी रामकुमार मौहारी ने अपने संबोधन में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को समाज सुधार, शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवा वर्ग सकारात्मक सोच और समर्पण के साथ कार्य करे तो समाज में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से नशामुक्ति, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। महाराणा प्रताप शैक्षिक संगठन के अध्यक्ष सतीश चंदेल ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही मजबूत और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण कर सकता है। उन्होंने समाज के सभी लोगों से शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और सहभागिता बढ़ाने की अपील की।
राजपूत समाज के अध्यक्ष कृष्णा सिंह परमार ने समाज हित में संचालित विभिन्न गतिविधियों, योजनाओं एवं भावी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा, सामाजिक सहयोग, प्रतिभा सम्मान और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सभी लोगों के सहयोग से एक नई सकारात्मक शुरुआत होगी और समाज निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। समारोह के दौरान समाज के वरिष्ठजनों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और महाराणा प्रताप के आदर्शों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन साहस, स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्रप्रेम का सर्वोच्च उदाहरण है, जो सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में न्याय समिति के अध्यक्ष मदन सिंह ठाकुर ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, समाज बंधुओं, युवा साथियों, विद्यार्थियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, संगठन और सक्रिय सहभागिता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार समाजहित के कार्यक्रमों में सभी से सहयोग और सहभागिता बनाए रखने की अपील की।
पूरे समारोह के दौरान महाराणा प्रताप के जयघोष, राष्ट्रभक्ति के नारों और सामाजिक एकता के संदेशों से वातावरण गूंजता रहा। कार्यक्रम ने न केवल महाराणा प्रताप के अद्वितीय व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण कराया, बल्कि समाज को संगठित होकर शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। समारोह उत्साह, अनुशासन, सामाजिक समरसता और गौरवपूर्ण वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।



