भक्त और भगवान में परिवार भाव सर्वोपरि : स्वामी नरसिंह दास

जबलपुर दर्पण। भक्त और भगवान बीच पारिवारिकता होना चाहिए, जिससे श्रीहरि सदैव संकटमोचन बनकर कष्टों को हरते हैं। श्रीहरि के विग्रह को परिवार का मुखिया मानकर सभी कार्य करना चाहिए, श्रीमद्भागवत पुराण सप्त दिवसीय महोत्सव जन्म और मृत्यु के बीच जीवन को सरलता से सुगमतापूर्वक जीने की विधि बताती हैं। जीवन में दैनिक दिनचर्या में भगवत भक्ति को सर्वौच्च प्राथमिकता देनी चाहिए उक्त उद्गार नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने कार्तिक मास के अवसर पर गीता धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पुराण के द्वितीय दिवस व्यास पीठ से कहे।
भगवान योगेश्वर पारदेश्वर महादेव, श्रीमद्भागवत जी का पूजन अर्चन शनि धाम के आचार्य जगदेव मिश्रा, आचार्य रामफल शास्त्री, हिमांशु शास्त्री, प्रियांशु मिश्रा ,राम भगत गुप्ता स्व. श्री मति सुमित्रा गुप्ता . लक्ष्मी प्रसाद. कुसुम. रेखा. लखनलाल. गुलाब रानी. डॉ दुर्गेश शिल्पा. डॉ रत्ना श्री कांत., प्रवीण . संदीप. सुनील.प्रदीप मिश्रा, शिवकुमारी. मेवालाल गीता गुप्ता ने किया।
कार्तिक मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पुराण में 21से 27 अक्टूबर तक दोपहर 3 बजे से व्यास पीठ से नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज कथा का श्रवण करायेंगे, नरसिंह मंदिर गीता धाम भक्त मंडल ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।



