सफर की रात में ‘या अली-या हुसैन’ के नारों से गूंजी मदन महल पहाड़ी

जबलपुर दर्पण । मुहर्रम की सातवीं तारीख (सफ़र की रात) पर मंगलवार को जबलपुर नगर एवं उपनगर के विभिन्न इमामबाड़ों में सुबह से ही अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर नूरानी नौजवान लंगर कमेटी, शान लंगर कमेटी, अमन एकता कमेटी, हुसैन एकता कमेटी, हैदरे लंगर कमेटी, अमर एकता कमेटी, कर्बला लंगर कमेटी एवं गौसे आजम लंगर कमेटी द्वारा जगह-जगह लंगर, छबील और शरबत वितरण की व्यवस्थाएं की गईं। समाचार लिखे जाने तक नगर एवं उपनगर के विभिन्न इमामबाड़ों से सवारियां निकलना शुरू हो चुकी थीं। नगर उपनगर के विभिन्न क्षेत्रों से सवारियां कई किलोमीटर का सफर करने के बाद मदन महल दरगाह पहुंचेंगी। जहाँ परंपरानुसार सवारियां सलामी पेश करेंगी। बैंड-बाजों के साथ निकली सवारियों में बड़े मुजावरों के साथ-साथ मासूम बच्चों पर भी ‘हाल’ की आमद हुई। अकीदतमंदों ने बाबा साहब लोगों से अपनी मुरादें बताई और बाबा साहब ने मुरादें पूरी होने की दुआ दी। पूरी रात मदन महल दरगाह और आसपास का क्षेत्र “या अली, या हुसैन” के नारों तथा ढोल-नगाड़ों की गूंज से सराबोर रहा।
जुलूस मार्ग के प्रमुख हिस्से छोटी बजारिया से मदन महल दरगाह तक लगभग तीन किलोमीटर लंबे रास्ते पर रात 8 बजे से ही जायरीनों का पहुंचना शुरू हो गया था। समय बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और देर रात तक यह दृश्य एक विशाल जनसैलाब में बदल गया। अकीदतमंदों ने पूरे जोश और अनुशासन के साथ मुहर्रम की इस पारंपरिक रस्म में सहभागिता निभाई। सदर: मुहर्रम की सातवीं तारीख (सफ़र की रात) पर सदर बाज़ार गली नंबर 9 स्थित कदीमी ताज़िए में सदर, गोरा बाज़ार, गोरखपुर एवं अन्य क्षेत्रों से आई सवारियों के मुजावरों ने हाज़िरी पेश की। इसके बाद सवारियां अकीदत के साथ सदर की गलियों में गश्त करती हुईं मदन महल दरगाह के लिए रवाना हुईं।
वहीं जमाअत-ए-कादरी के सदस्यों ने विभिन्न सवारियों के हिंदू एवं मुस्लिम मुजावरों का दूध के प्याले पेश कर इस्तकबाल किया। पुलिस प्रशासन, मीडिया प्रतिनिधियों तथा समाजसेवियों का भी सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।
सिटी कोतवाली क्षेत्र में चाय-पानी की व्यवस्था
सिटी कोतवाली: सिटी कोतवाली बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला के सामने, मरहूम शेख मुन्ना नियाजी और मरहूम अब्दुल रऊफ बाबा नियाजी के इमामबाड़े में मुहर्रम की सातवीं तारीख सफर की रात को हाजी शेख जमील नियाजी, हाजी शेख मुबीन नियाजी, हाजी शेख अनवार नियाजी और हाजी बाबा सैयद शेख अमीन कर्बलाई साहब की सरपरस्ती में जायरीनों के लिए चाय पानी का इंतजाम किया गया। सफर की रात के जुलूस में शामिल हजारों जायरीनों ने इस आयोजन में शिरकत की। इस मौके पर मोहम्मद रईस नियाजी, मीर फैजान अली नियाजी, हाजी मोहम्मद अनीस नियाजी, मोहम्मद अबरार नियाजी, मोहम्मद हुसैन नियाजी आदि उपस्थित रहें।
शानो ए शौकत से किया गया नूरानी शहंशाह सरकार का शाही संदल
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी ज्योति नगर गढ़ा स्थित विक्की पहलवान के इमामबाड़े में मोहर्रम की सात तारीख , 23 जून को हजरत सैय्यद शेरुद्दीन नूरुद्दीन नूरानी शहंशाह वली सरकार का शाही संदल शानो ए शौकत से किया गया। इमामबाड़े के मुकेश दुबे, मोनू, सनी, पियूष सहित अन्य ने बताया कि नूरानी सरकार का शाही संदल हाजी इम्तियाज अली खान की सरपरस्ती में हुआ जिस दौरान ताजपोशी, फूलपोशी की गई। आयोजन के दौरान विशाल लंगर का ऐहतमाम किया गया जिसे बड़ी संख्या में मौजूद अकीदतमंदों ने ग्रहण किया।
मुहर्रम की सातवीं तारीख पर निकला मातमी जुलूस, कर्बला के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान
मुहर्रम की सातवीं तारीख के अवसर पर सदर आला डॉ. बटालिया के सामने स्थित मरहूम बाबा जाफरी साहब के इमामबाड़े में दोपहर 2 बजे मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस की शुरुआत जनाब हैदर जबलपुरी द्वारा मर्सिया और जनाब नाईब रिज़वी द्वारा सलाम पेश कर की गई।
मुरादाबाद से तशरीफ लाए मौलाना जाफर रज़ा साहब ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि आज निकाले जाने वाले मातमी जुलूस का उद्देश्य केवल शोक प्रकट करना नहीं, बल्कि कर्बला के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह जुलूस हमें याद दिलाता है कि अन्याय, अत्याचार और झूठ के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्ता या सांसारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपने परिवार एवं साथियों सहित महान कुर्बानी दी।
मजलिस के उपरांत अपराह्न 3:30 बजे मातमी जुलूस बाबा जाफरी के इमामबाड़े से रवाना हुआ। जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग घंटाघर, बड़ी ओमती और गलगला होते हुए गलगला स्थित शिया इमामबाड़े पहुंचा।
जुलूस के दौरान जनाब सुज्जू मंडलवी, काज़िम रिज़वी, शुजाअत रिज़वी, फैज़ान नकवी, मुर्तज़ा नकवी एवं शम्सुल रिज़वी ने नोहाख्वानी की, जिस पर अकीदतमंदों ने मातम कर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।


