जीवित कुआं में जा रहा गंदा नाली का पानी, सफाई व्यवस्था दूर की बात, जल गंगा मिशन अभियान की बोलतीं तस्वीर

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिला के सिहोरा नगर पालिका परिषद अंतर्गत आने वाले नगर खितौला बस्ती वार्ड नंबर 17 स्थिति गली नंबर एक भूतेश्वर मंदिर के सामने कई वर्षों पुराना जीवित कुंआ दुर्दशा का शिकार बना हुआ हैं। एक ओर जहां मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कुआं, तालाब, बावली जैसी धरोहरों को बचाने और पुनः जीनद्वार करने बड़े बड़े विज्ञापन, होडिंग के साथ अधिकारियों कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था। लेकिन वास्तविकता वर्तमान इन तस्वीरों में साफ़ नजर आ रहीं हैं। और ये बयान कर रहीं हैं कि जल गंगा मिशन कितनी सच्चाई के साथ सफल हुआ हैं।
खितौला वार्ड क्रमांक में स्थित प्राचीनकाल से बने इस कुआं की गहराई 30 फिट के साथ भी आज ये जीवित हैं और प्लेट होने के कारण क्षेत्रों के आसपास के घरों में वॉटर लेबल बनाने की क्षमता रखता हैं।
पर ये दुर्भाग्य है कि आज के परपर्स में स्थानीय लोगों ने कोई ध्यान नहीं दिया। जबकि इस समस्याओं को लेकर वार्ड पार्षद रमेश पटेल ने लिखित आवेदन भी मुख्य नगर पालिका परिषद अधिकारी को दिया गया था।
एक माह पहले दिए गए आवेदन – वार्ड वासियों ने हमारे मीडिया प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान बताया कि नगर पालिका प्रशासन की कोई भी रूचि इसकी सफाई व्यवस्था और सुरक्षित रखने की दिखाई दे रहीं हैं।
कोरोना काल के समय इस कुआं में पूर्व नगर पालिका अधिकारी ने लोहे का जाल लगवाया था। जिससे जल संरक्षण अधिक हो सकें और कोई भी जीव जन्तु इसमें न गिर सके।
स्थानीय लोगों का गन्दा नाली का पानी जा रहा इस कुआं में – वार्ड पार्षद और स्थानीय लोगों ने पूर्व में भी इस कुआं की सुरक्षा और सफाई को लेकर आवेदन किया गया था।
नगर पालिका परिषद सिहोरा – नगर पालिका परिषद सिहोरा में पदस्थ इंजीनियर गौरव चौधरी को वार्डो में कई कुओं की सुरक्षा व्यवस्था और उनके पुनः जीवित संरक्षण करने को मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया था। लेकिन इनके द्वारा अपने कर्तव्यों का समय रहते निर्वहन नहीं किया गया हैं। अब बारिश के समय में विभिन्न प्रकार की बीमारी के साथ दूषित पानी के कारण उल्टी दस्त या फिर वॉर्ड में संक्रमण जैसी बीमारी होने का डर वॉर्ड में सता रहा हैं।
स्थानीय लोगों ने इस ओर जल्द सुधार और सफाई की मांग उच्च अधिकारी के समक्ष रखीं हैं।
वहीं अन्य जगहों पर ओपन, खुले कुआं का भी जाल डालने की गुहार लगाई हुई हैं।
समाचार लिखे जाने के पहले जब इंजीनियर गौरव चौधरी से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।




