जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जबलपुर शंकराचार्य श्री निश्चलानन्द सरस्वती 80 वां प्राकट्य दिविस कल

जबलपुर- पूज्य पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य श्री निश्चलानन्द सरस्वती जी महाभाग का कल आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी को 80 वां प्राकट्य दिवस है। जिस पर विभिन्न समारोह आदित्य वाहिनी आनंद वाहिनी के तत्वाधान में दमोह नाका जबलपुर और ग्वारीघाट जबलपुर में हुए दिनाक 26.6.22 शाम 6बजे महाआरती
इस अवसर पर शंकराचार्य जी के कृपा पात्र शिष्यों कैप्टन आलोक त्रिवेदी, सिख संगत संयोजक और ग्रामीण पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव सरदार सुरजीत सिंह, पूर्व आदित्यवाहिनी संयोजक और नर्मदा महाआरती मंडल प्रमुख के पंडित ओंकार दुबे, आनंद वाहिनी की प्रोफेसर सुनीता त्रिवेदी, युवा नेता रेवाखंड सचिव अपूर्व त्रिवेदी, हाईकोर्ट संगठनों के विभिन्न पदाधिकारी एडवोकेट और श्री कोष्टा, श्री विश्वकर्मा, श्री उमेश दुबे, आदित्य वाहिनी संयोजक जबलपुर; आनंद वाहिनी की श्रीमती निशा दुबे; युवा प्रकोष्ठ संयोजक श्री अनंतजित त्रिवेदी, कुमारी तेजस्विनी दुबे द्वारा विचार प्रस्तुत किये गये। कार्यक्रम में अन्य शिष्य गण भारी संख्या मे उपस्थित थे और शंकराचार्य जी के संकल्प और उद्देश्यों हेतु संकल्पित हुए।
शंकराचार्य श्री निश्चलानन्द सरस्वतीजी पूरे राष्ट्र और नेपाल के सतत भ्रमण से सनातन एकता और सभी के सम्मान और अर्थिक -धार्मिक स्वतंत्रता के साथ हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु प्रयास कर रहे हैं।
उन्हें 1992 में ऋग्वेद पूर्वाम्नाय पीठ पर शंकराचार्य पद पर पूर्व शंकराचार्य ब्रह्मलीन पूज्य निरंजन देव तीर्थ द्वारा पूर्व घोषित निर्णय अनुसार प्रतिष्ठित हुए।
विभिन्न राजनीतिक संस्थानों द्वारा नकली शंकराचार्य को सभी चार पीठों पर जोड़ने के लगातार प्रयास मीडिया और विभिन्न मंचों के दुरुपयोग से हुए है और सनातन हिन्दुओ को कमजोर करने की कोशिश हुयी है उस पर उद्गार व्यक्त किए।
क्या इस्लामिक हमले से छीने गए सर्वोच्च तीर्थ स्थल में हिन्दू सारे साक्ष्य होने पर भी खून का घूंट पीकर धर्म के विपरीत विधर्मी अन्याय को सह ले?अमेरिका में सफल अभियान के द्वारा हिन्दू विरोधी इस्लामी परस्त पत्रकार, और उनके मूल में स्थित संगठन भारत सरकार पर अपना दबाव बनाने में सफल हो जाते हैं। पूर्व में सनातन धर्मी सिखों के मान बिंदुओं पर भी कुठाराघात हो चुके हैं।
पुरी पीठ शंकराचार्य जी का स्पष्ट मत है कि पूर्व काल में विदेशी आक्रान्तओं द्वारा विकृत किए गए हिन्दुओ के प्रमुख तीर्थ मंदिरों को वापस पाना हमारा अधिकार है परंतु यह सद्भावना से हो और मुस्लिम हिन्दुओ की धार्मिक भावना का सम्मान करें। शंकराचार्य जी ने कहा कि हिन्दू तीर्थ मंदिरों को सरकार अपने नियंत्रण से मुक्त करे जिससे उनका शास्त्रीय विधा से संचालन हो और उनमे आए दान का हिन्दुओं के हित मे सदुपयोग हो।
शंकराचार्य जी के उद्गारों को व्यक्त करते हुए उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि स्वतन्त्रता के बाद भी हिन्दू एक नंबर का नागरिक नहीं। जर्सी सांड व संकर प्रजाति के बीजों से भारत भूमि को दूषित और बंजर बनाया जा रहा। शिक्षा, रक्षा, वित्तीय, उद्योग कोई भी प्रणाली हमारी अपनी नहीं। इतिहास का विकृत रूप पढ़ाया जा रहा है। सनातनियों के सभी वर्गों के तेजस्विता को दिशाहीन गलत विवाहिक जीवन पद्धति संस्कार की तरफ़ मोड़कर, आधुनिकता के नाम नष्ट किया जा रहा है।
हमारे प्रशस्त मान बिंदुओं को विकृत दूषित किया जा रहा है माँ गंगा नर्मदा महानदी, सरयू, गौ माता इत्यादि सभी के मूल स्वरूप और आस्था को विकृत किया गया है।
पुज्य शंकराचार्य जी ने विभिन्न मंचों से सभी सनातन धार्मियों को,धर्म के प्रशस्त मान बिंदुओं की रक्षार्थ संगठित होकर रहने का आवाहन किया।

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