सब्र ईमादारी और सच्चाई के लिए शहीद हुए इमामे हुसैन : सरताज मंज़िल

जबलपुर दर्पण। मोहर्रम की 10 तारीख मजहबे इस्लाम मे एक खास अहमियत रखती है, भाजपा युवा नेता सरताज मंज़िल ने बताया के मोहर्रम की 1 तारिख को इस्लामि नया साल मनाया जाता है, मोहर्रम की 10 तारीख को इस्लाम के आखरी पैगम्बर ईशदूत हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम के नवासे हज़रत अली रज़ियल्लाहू के बेटे इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु को उन लोगों ने शहिद कर दिया जो मोहब्ब्त और इंसानियत के दुशमन थे, रब्बे कायनात ने मोहर्रम की 10 तारिख को ही हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु की शहादत को इसलिये भी कुबूल किया क्योंकि ये दिन मजहबे इस्लाम में एक खास मर्तबा रखता है, इस दिन को इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु की शहादत से पहले अन्य इस्लामी ईशदूत पैगम्बर की दुआएं कुबूल हुई साथ ही उन्हें उनकी तकलीफों और परेशानियों से निजात मिली और अल्लाह ने उन्हें इनामात से नवाजा जैसे इस दिन हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की दुआ कुबूल हुई, हजरत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती को किनारा मिला, हजरत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से बाहर निकाले गए, हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के लिये आग गुलज़ार हुई, हजरत याकूब अलैहिस्सलाम अपने बेटे हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम से 40 साल बाद मिले, हजरत अय्यूब अलैहिस्सलाम को लम्बी बीमारी के बाद सेहत अता हुई, 10 मोहर्रम को ही फिरौन का लशकर भी गर्क हुआ, आज ही के दिन आखरी पैगम्बर नबीये अकरम का पहला निकाह हुआ और आज ही के दिन आपने मक्के से मदीना हिजरत फ़रमाई, और भी बहोत सारी मुश्किलात इस दिन आसानी में तब्दील हुई, इसलिए मोहर्रम की 10 तारीख जिसे यौमें आशूरा कहते हैं इस दिन तमाम मुसलमानों को रोजे रखना चाहिए और हर उस गलत काम से बचना चाहिए जो इस्लाम और इंसानियत की खिलाफ हो, आप सभी को यौमे आशूरा की मुबारकबाद।



