स्वार्थ और अहंकार में पड़ा व्यक्ति हिंसक हो जाता है:स्वामी श्रवणा नंद जी

पाटन ब्यूरो/जबलपुर दर्पण। जब किसी के स्वार्थ की पूर्ति में बाधा पड़ती है व्यक्ति के अहंकार को चोट पहुंचती है तब वह क्रोध से भर जाता है और हिंसक बनकर विनाश के लिए उद्धत हो जाता है। इंद्र की पूजा को रोककर जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन की पूजा कराई तब इंद्र की यही दशा हुई वह भूल गया की गोप पीढ़ियों से उसकी पूजा कर रहे हैं और हिंसक बनकर उसने प्रलय कालीन बादलों को आदेश देकर व्यापक विनाश का दुष्चक्र चलाया श्री कृष्ण प्रतिकार में सक्षम थे किंतु उन्होंने गोवर्धन उठाकर ग्वाल बालों को श्रेय दिया उक्त आशय के उद्गार भागवत मर्मज्ञ संत श्रवणानंद जी महाराज ने श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में व्यक्त किए महाराज जी ने कहा की निष्ठावान ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है यदि किसी वृक्ष पर्वत के प्रति भी निष्ठा बन जाती है तो यही निष्ठा परमात्मा से मिलाने का माध्यम बन जाती है हमारे सनातन धर्म के प्रत्येक क्रियाकलाप विज्ञान सम्मत है किंतु हमारी आस्था धर्म पर है इसलिए उन्हें धर्म से जोड़ दिया गया है। ज्ञान यज्ञ में पधारे नरसिंह पीठाधीश्वर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने कहा कि गोवर्धन का पूजन करा कर भगवान कृष्ण ने प्रकृति के रक्षण संरक्षण और उस से प्रेम करने का संदेश दिया है यदि हम अपने जीवन की सुरक्षा चाहते हैं तो हमें प्रकृति के वातावरण को प्रदूषण से मुक्त रखना ही होगा भागवत की शिक्षाएं हर युग के लिए उपयोगी हैं किंतु वर्तमान में इनके महत्व को जानकर उनके अनुरूप चलने की नितांत आवश्यकता है। इस अवसर पर सरदार नगर होशंगाबाद के महंत केशव दास जी महाराज एवं विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय मठ मंदिर प्रमुख अशोक तिवारी जी उपस्थित थे आयोजकों की ओर से सभी अतिथि जनों का पूजन वंदन एवं सम्मान किया गया है।





