श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा में भगवान श्री कृष्ण का रुक्मणी के साथ हुआ विवाह

जबलपुर दर्पण। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के छठे दिन महंत श्री योगी राजेश महाराज ने वर्णन करते हुए बताया कि कंस का अर्थ अभिमान ही होता है 16 हजार 108 विवाह भगवान के हुए मंहत श्री योगी महाराज ने कहा कि यह सब भगवान की लीलाएं थी क्योंकि जब भी संसार में कष्ट होता है भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं शिशुपाल एक अभिमान का रूप था राक्षस प्रवृत्ति का था उससे कोई भी कन्या विवाह नहीं करना चाहती थी तो रुकमणी कमल पुष्प से प्रकट हुई थी लक्ष्मी के रूप में थी उन्होंने भगवान का स्मरण करते हुए प्रति रूप में परमपिता को अपनाया भगवान ने रक्षा करते हुए रुक्मणी को राक्षस प्रवृत्ति से विवाह संपन्न किया भगवान सर्व अंतर पति हैं परमात्मा ही तो सब के प्रति हैं इसलिए हम सभी कहते हैं कि भगवान जगतपति हैं महंत जी ने एक और वर्णन बताया कि भूषण राक्षस था 16,000 गोपियों को बंधक बनाया हुआ था उसका यह संकल्प था जब 20000 गोपियों हो जाएंगी तो उन सभी से समूह रूप से विवाह करूंगा भगवान ने ऐसे राक्षस से गोपियों की रक्षा करते हुए उन्हें बंधन मुक्त कराया यदि इन गोपियों को नहीं अपनाते तो संसार में विकृति फैल जाती क्योंकि हमारे सनातन में कोई कन्या भाग जाती है उसे दोबारा घर जाने में भी दिक्कत होती है और दूसरा कोई भी नहीं अपनाता इस अवसर पर प्रकाश पटेल रमेश पटेल अंशुल पटेल नम्रता अग्रवाल ममता सराफ गुंजन सराफ संगीता पटेल सविता पटेल दिव्या गुप्ता आदि मात्र शक्तियां इस भागवत कथा में सम्मिलित हैं।



