एक तरफ वोट के लिये आदिवासियों को साधने की नोटंकी,वही दूसरी और एसडीएम मों शाहिद खान के द्वारा,आदिवासी महिला जनपद अध्यक्ष का अपमान

पाटन ब्यूरो/जबलपुर दर्पण। शिवराज सरकार अपने वोट बैंक की राजनीति के लिये कुछ समय से आदिवासियों को लुभाने में लगी है। 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मना कर प्रदेश के आदिवासियों के लिये पैसा एक्ट लागू किया और पैसा एक्ट की जनजागृति के लिये सरकार अपने नेता व अफसरों को गांव-गांव भेज रही है वही दूसरी ओर पाटन एसडीएम मों शाहिद खान के द्वारा पोटोकाल का उलंघन कर आदिवासी महिला जनपद अध्यक्ष मीना सिंह का बार बार अपमान किया जा रहा है। मंच पर उचित स्थान न देकर आखरी कुर्सी पर बैठा दिया जाता है चुकी जनपद अध्यक्ष एक आदिवासी महिला है इसलिए पाटन एसडीएम की मौजूदगी में अपमान किया जा रहा है। वही जनपद सदस्य श्रीमती रुकमणी दुबे के पति शिवकुमार दुबे उर्फ मुंडे महाराज किस हैसियत से पाटन जनपद पंचायत की बैठक में मौजूद रहकर बैठक में दखल देते है जबकि शासन के निर्देश अनुसार कोई भी महिला जनप्रतिनिधि के पति या परिवार के सदस्य शासकीय बैठकों में शामिल नहीं हो सकते यदि कोई ऐसा करते पाया जाता है तो उस महिला जनप्रतिनिधि की सदस्यता भी शून्य की जा सकती हैं ऐसे निर्देश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दे रखे है लेकिन यह उलंघन एसडीएम की मौजूदगी में निरंतर होता रहता है। इनके जनपद सदस्य क्षेत्र में राशन की काला बाजारी चर्म पर है साथ ही खेतों से रेत का अवैध उत्खनन जोरों पर चल रहा है। कुछ समय पहले ही अवैध रेत उत्खनन के कारण दो सगी बहनों की जल समाधि बनने के कारण शासन को मुआवजा देना पड़ा था। यह सभी महत्पूर्ण तथ्यो को दरकिनार करते हुए महिला जनपद सदस्य के पति को सम्मान देकर एक आदिवासी जनपद अध्यक्ष महिला का अपमान करना पाटन एसडीएम के लिए कोई नई बात नही है। माननीय के हाथ की कठपुतली बने साहब उतना ही कर रहे है जितना माननीय का आदेश मिलता है। माननीय तो आते जाते रहेंगे आज है शायद कल न रहे चुकी आप शासकीय अधिकारी है इसलिए आमजन आपसे निष्पक्ष कार्य की आशा रखते है..?



