सिविल जज भर्ती 2022 की संवैधानिकता को चुनौती

जबलपुर दर्पण । मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती परीक्षा 2022 के विज्ञापन 17/11/2023 की संवैधानिकता सहित सिविल जज भर्ती नियमों को हाईकोर्ट में एडवोकेट यूनियन फार डेमोक्रेसी एंड शोसल जस्टिस नामक संस्था द्वारा एक जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिका में भर्ती नियम 1994 में किए गए संशोधन 23/6/2023 के नियम 5 की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। उक्त नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 234 तथा अनुच्छेद 335 से असंगत बताया गया है। उक्त नियम 5 में आरक्षित तथा अनारक्षित वर्ग को मुख्य परीक्षा में एग्रीगेट 50% नियत किया गया है जबकि प्रत्येक विषय में आरक्षित वर्ग को 45% तथा अनारक्षित वर्ग को 50% क्वालीफाइंग अंक निर्धारित किए गए है। उक्त नियम के हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा में भी असंगति है। याचिका में दूसरा आधार यह है की अनारक्षित वर्ग में हाईकोर्ट द्वारा 17 पद बैकलाग के रूप में विज्ञापित किए गए है , जबकि बैकलाग आरक्षित वर्ग का होता है न की अनारक्षित वर्ग का | उक्त याचिका में हाईकोर्ट द्वारा दिनांक 24/01/2025 को अंतरिम आदेश पारित कर समस्त भर्ती प्रक्रिया को स्टे कर दिया गया था तत्पश्चात सुप्रीम कोर्ट की याचिका में पारित आदेश दिनांक 03/03/2025 में जारी निर्देशों के कारण हाईकोर्ट द्वारा दिनांक 16.05.2025 को पारित अंतरिम आदेश 24/01/2025 को अपने आदेश में परिवर्तन करके समस्त भर्ती को याचिका 40833/2024 के अंतिम निर्णयाधीन कर दी गई थी।उक्त याचिका की पुनः सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा की गई। हाईकोर्ट द्वारा कहा गया की एस.सी. एस.टी. वर्ग के लिए हाईकोर्ट द्वारा अपने खर्चे पर कोचिंग आरंभ कर दी गई है जिसमे अभी तक एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों का पंजीयन हो चुका है। सुनवाई में हाईकोर्ट ने खेद जताया कि मध्य प्रदेश में सिविल जज भर्ती चार वर्ष लेट चल रही है जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने समय पर प्रति वर्ष भर्ती करने के निर्देश दिए है। वर्तमान में भर्ती परीक्षा 2022 विवादों के घेरे में उलझी है। जिनके लिए आगामी भर्ती परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा ताकी आरक्षित वर्ग के सभी पद भरे जा सके। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया की आरक्षित वर्ग के रिक्त पदों को सामान्य वर्ग से नही भरा जाएगा इसलिए याचिका कर्ता अपनी याचिका बापिस ले लें। लेकिन याचिका कर्ता के अधिवक्ताओ ने कोर्ट से निवेदन किया की याचिका में उठाए गए मुद्दों पर हाईकोर्ट गुण दोषों के आधार पर निर्णय पारित करे। तब हाईकोर्ट ने उक्त याचिका में प्रभावी अंतरिम आदेशो को निरस्त करके हाईकोर्ट की परीक्षा सेल को आगामी भर्ती नियमित रूप से करने का निर्देश दिया गया तथा याचिका की सुनवाई 04/05/ 2026 को नियत की गई। याचिका कर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेन्द्र कुमार शाह, अखलेश प्रजापति, मधुसूदन कुर्मी, अभिलाषा लोधी ने पक्ष रखा |


