पवित्र नर्मदा मैया की परिक्रमा, तीर्थ यात्रियों की सानन्द वापसी

जबलपुर दर्पण। जहाँ आस्था है वही सन्मार्ग का रास्ता पवित्र पुण्य सलिला नर्मदा मैया की श्री कृपा पाने कठिन और दुर्गम परिक्रमा का संकल्प लिया इन भक्तों ने और इस कड़कड़ाती ठंड में अपना अनुष्ठान पूरा करने निकले नर्मदा भक्त के मार्गदर्शक एवं संचालक श्री गोविंद मिश्रा (बम्हौरी, तारादेही) के कुशल नेतृत्व में ४ बसों में लगभग २४० यात्रियों को बरमान घाट से माँ नर्मदा परिक्रमा १५ नवम्बर से प्रारंभ होकर विभिन्न दुर्गम मार्गों व माँ नर्मदा जी के पवित्र घाटो में सुबह व संध्या कालीन आरती व दर्शन कराते हुए बिम्बलेश्वर ( भडूच) गुजरात पहुचकर माँ नर्मदा परिक्रमा वासियों को नाव व्दारा समुद्र पार मीठी तलाई, से, द्वारिकाधीश धाम के साथ सोमनाथ व नागेश्व्रर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए। यात्रा व दर्शन अंमरकंटक माँई की बगिया, से महाराजपुर,मंडला, झौतेश्वर, बरमान घाट पर परिक्रमा संकल्प पर विराम के साथ माँ नर्मदा जी के जल को लेकर परिक्रमा वासीयो ने ओंकारेश्वर मे विधि-विधान के साथ पूजन अर्चना के बाद भगवान को जलाभिषेक किया। उपरांत सभी यात्रियों ने भगवान महाकाल के दर्शन (उज्जैन) में करके आज दिनांक ६-१२-२२ को सभी परिक्रमा वासी अपने अपने घर सकुशल पहुंचे रास्ते भर यात्रिओ का स्वागत, जल पान, चाय, नाश्ता, भोजन मार्ग वासियो ने प्रेम पूर्वक कर पुण्य लाभ प्राप्त किया इस आस्था मयी यात्रा में श्री गैबिनाथ मन्दिर सेवा समिति के डा. बी,पी.अवस्थी, विजय लक्ष्मी, सुधा अवस्थी, विजय दुर्गा तिवारी गढ़ा, कैलाश-संगीता परौहा, हेमराज, सुमन शुक्ला, मनोरमा दुबे कटनी, मनीषा अनिल शुक्ला सत्य प्रकाश तिलहरी, आरती-कृष्णा पाठक, दौलत सिंह, लाखन ठाकुर मुन्नी बाई,जानकी बाई,गोलू पटेल,छोटू मिश्रा सहित अन्य परिक्रमावासीयो ने एक परिवार के साथ सुखद यात्रा पूर्ण की। जबलपुर पहुँचे परिक्रमा का गाजे बाजे, फूल माला श्रीफल भेंट कर अनिल शुक्ला, श्रीमती भागवती शुक्ल,अवस्थी जी,रमेश वंदना तिवारी, मनीष दुबे, अतुल अवस्थी, अंजुल तिवारी, अनुराग गरिमा शुक्ला, सहित अन्य परिवार जनों व नगर वासियो ने भव्य वंदन अभिनन्दन किया । परिक्रमा वासियो में बी पी अवस्थी, कैलास परोहा, विजय दुर्गा तिवारी, श्रीमती मनीषा अनिल शुक्ला सहित अन्य सभी ने अपने अपने घर जाकर श्री सत्य नारायण भगवान की कथा पूजन कर कन्याओं अपने परिवार जनों को नर्मदा मैया का प्रसाद, भंडारा के रूप में प्रदान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।



