गांव गांव शराब का कहर: प्रशासन के उदासीन रवैया से,नौजवानो की रगों में दौड़ रहा शराब का नशा

पाटन ब्यूरो/जबलपुर दर्पण। शराब पीने के वैसे तो कई फायदे है लेकिन शराब पीने का सबसे बड़ा फायदा शराब पीने से व्यक्ति का आत्म विश्वास बढ़ता है। और यही आत्म विश्वास बढ़ाने पाटन के दो-चार नेता, एसडीएम एवं कुछ प्रसासनिक अधिकारीयो ने मौन धारण किया है जिसकी वजह से शराब ठेकेदार नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के गांव गांव में शराब बिकवा रहे है। हम बात कर रहे हैं पाटन तहसील के नगर एवं ग्रामीण इलाकों में फैले शराब के कारोबार की, आखिर किसके संरक्षण में तहसील के हर गांव में शराब उपलब्ध हो रही है। जबकि भाजपा के ही केंद्रीय मंत्री ने अपने बेटे को नशे की लत की वजह से खो दिया वहीं दूसरी तरफ पाटन शराब दुकानदार को संरक्षण देने वाले प्रशासनिक अधिकारी एवं कुछ नेता भ्रष्टाचार की नदी में गोते लगा रहे हैं। इन्हीं की वजह से पाटन की शराब दुकान एवं अहाते जो वर्तमान शराब नीति का खुलेआम उल्लंघन करते हुए सरकार की हँसी उड़ा रहे हैं। वही नशे में टल्ली शराबी नगर एवं ग्रामीण इलाकों में उत्पात मचा रहे है। पाटन नगर इसका जीता जागता उदाहरण हैं। पाटन शराब दुकानदारों के अपने ही नियम है। जबकि आबकारी विभाग के नियम अनुसार जिस नगर पंचायत की जनसंख्या बीस हजार या उससे कम है उस निकाय से गुजरने वाले स्टेट हाईवे की रोड़ से 220 मीटर की दूरी पर ही शराब दुकान संचालित की जा सकती है। जबकि पाटन नगर की अंग्रेजी शराब दुकान स्टेट हाईवे से महज 10 मीटर की दूरी पर एवं देशी शराब दुकान भी लगभग 50 मीटर की दूरी पर नियम विरुद्ध संचालित हो रही है।
मदिरा दुकानों से बिक्री का समय :- मदिरा दुकानों की साफ-सफाई व मंदिरा स्टॉक एवं दैनिक लिखा पढ़ी के लिए प्रातः 8.30 बजे से 9.30 बजे तक का समय विभाग के द्वारा निर्धारित किया गया है इस समय उक्त दुकान से शराब बिक्री प्रतिबंधित रहती है। आबकारी विभाग के द्वारा मदिरा विक्रय का समय प्रातः 9.30 बजे से रात्रि 11.30 बजे तक ही निर्धारित किया गया है। जबकि पाटन नगर की मदिरा दुकानों से लगभह प्रातः 8 बजे से ही बिक्री चालू हो जाती हैं एवं देशी शराब दुकान तो साईड वाली खिड़की से 18 घण्टे संचालित की जा रही है। जिसकी वजह से चाय पीने के समय पर मदिरा प्रेमी शराब के नशे में टल्ली मिलेंगे वैसे भी सरकार का तंबू मदिरा प्रेमियों के बम्बू पर टिका है.!
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार आबकारी विभाग के नियमों को ताक पर रखकर शराब दुकान संचालित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों एवं दो-चार नेताओं को हर महीने लाखों रूपए की लक्ष्मी उपहार स्वरूप भेट की जाती है जिसकी वजह से इनको शराब दुकानों में कोई भी खामी नजर नहीं आती। किसी ने सच ही कहा है। हक़ और सच के लिए लड़ना ही असली धर्म है। बिका हुआ नेता, डरा हुआ प्रशासन, मुर्दा विपक्ष एवं आवाम तीनों लोकतन्त्र के लिए घातक है..!



