येशु मेरे पापों के लिए बलिदान हुए

मेरे अति प्यारे – प्यारे भाईयों एवं बहनो , आज पुण्य शुक्रवार हैं और हमें प्रभु के मारण पर मनन करना अति आवश्यक हैं क्योंकि मरने के बाद ही जीवन में प्रवेश करते हैं जैसे की वचन कहता हैं संत योहन के सुसमाचार में 1223-24 ईसा ने उन से कहा- ” वह समय आ गया है , जब मानव पुत्र महिमान्वित किया जायेगा । मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- जब तक गेहूँ का दाना मिट्टी में गिरकर नहीं मर जाता , तब तक वह अकेला ही रहता हैं , परन्तु यदि वह मर जाता हैं , तो बहुत फल देता हैं ” । क्यो प्रभु को इस संसार के लिए अपना जीवन बलिदान करना पड़ा ? क्योंकि वह मानव जाति को प्यार करता जैसा कि वचन कहता हैं- संत योहन के सुसमाचार अध्याय 3 : 16-17 ईश्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया , जिससे जो उसमें विश्वास करता हैं उसका सर्वनास न हो , बल्कि अनन्त जीवन प्राप्त करे । ईश्वर ने अपने पुत्र को संसार में इसलिए नहीं भेजा कि वह संसार को दोषी ठहराये । उसने उसे इसलिय भेजा हैं कि संसार उसके द्वारा मुक्ति प्राप्त करे । ईश्वर किन चीजों से हमें मुक्ति देना चाहते हैं ? जैसा कि लिखा हैं रोमियों के नाम संत पौलुस का पत्र अध्याय 3 23-25 क्योंकि सबों ने पाप किया और सब ईश्वर की महिमा से वंचित किये गए । क्योकि एक ही मनुष्य के द्वारा संसार में पाप का प्रवेश हुआ और पाप द्वारा मृत्यु का । इस प्रकार मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई क्योकि सब पापी हैं । ईश्वर की कृपा से सबों को मुफ्त में पापमुक्ति का वरदान मिला हैं , क्योकि ईसा मसीह ने सबों के पापों को अपने कूस मरण के द्वारा अपने ऊपर ले लिया । ईश्वर ने चहा कि ईसा अपना रक्त बहा कर पाप का प्रायश्चित करें और हम विश्वास द्वारा उसका फल प्राप्त करें । उसका फल हैं प्रभु ईसा मसीह के द्वारा अनन्त जीवन प्राप्त करें । क्यों ईश्वर के पुत्र , को हमारे लिए मरना पड़ा ? क्योंकि पुराने विधान में लोग शुद्ध भेड़ और बकरो के रक्त से अपने- आपको पापों से शुद्ध करते थे , लेकिन वह उन्हें अपने पापों से मुक्त करने में असमर्थ था । लेकिन प्रभु येशु खीस्त निर्दोष , पवित्र और निष्कलंक थे इसलिए मानव मुक्ति के लिए अपने आप को बली चढ़ा दिया जैसा कि लिखा है- संत पेत्रुस का पहला पत्र अध्याय 1 : 18-19 आप लोग जानते हैं कि आपके पूर्वजो से चली आयी हुई निरर्थक जीवन चर्या से आपका उद्धार सोने – चाँदी जैसे नश्वर चीजों की कीमत पर नहीं हुआ हैं बल्कि एक निर्दोष तथा निष्कलंक मेमने अर्थात मसीह के मूल्यवाल रक्त की कीमत पर । येशु ने अपने क्रूस मारण से हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया । वह हमारे पापों को क्षमा करता हैं , आज आप अपने स्वार्गिय पिता की असीम कृपा और प्रेम को जान सकते हैं । कि ईश्वर ने अपने पुत्र को हमारे लिए अर्पित किया क्योकि वह हमें हर एक दुखों से , कष्टों से बचाना चाहता हैं , प्रभु येसु ने अपने क्रूस मरण के द्वारा , हमारे पापों के लिए कीमत चुकाया हैं । मेरे लिए और आपके लिए खुश खबरी ये हैं कि हम अपने पापों के लिए प्रायश्चित करे और प्रभु कि ओर लौट जाये , हम लौट जाए अपने पापों से , अपने टूटे हुए रिश्तो से , अपने घमंड और अहंकार से . हम लौट जाए वासनाओ से , बुरे आदतो से . हम लौट जाए अपने माता – पिता के पास , हम लौट जाए अपने रिश्तेदारों और मित्रों के पास ताकि हम ईश्वर को प्रिय लगे । ईश्वर पर विश्वास करे और अपने जीवन को ईश्वर के लिए सौंप दे और सच्चे विश्वासी बन कर उनका अनुकरण करे क्योंकि जो अनुकरण करता हैं उसे रोज अपना कुस उढ़ाकर उसके पिछे चलना पड़ता हैं । तब आपके जीवन में परिवर्तन आयेगा और ईश्वरिये अनुग्रह और कृपा बनी रहेंगी और आपका सम्पूर्ण परिवर्तित हो जायेंगा।
फादर रंजित लकड़ा
मैनेजर संत थॉमस
उच्च माध्य. विद्यालय, जबलपुर



