सच होगा अब सब का सपना, दहेज मुक्त होगा भारत अपना

जबलपुर दर्पण। ऐसा कोई विवाह देखा है जहां दूल्हा-दुल्हन साधारण वेशभूषा में हो? जहां बिना आडम्बर जैसे हल्दी, मेहंदी, मंडप आदि रस्मों रिवाज के बिना विवाह संपन्न हुआ हो तथा जहाँ दहेज का नामोनिशान ना हो तो आप कहेंगे नहीं। लेकिन ऐसे एक नहीं बल्कि अनेक विवाह, बिना बैंड बाजे तथा साधारण वेशभूषा में संत रामपाल महाराज के सानिध्य में हो रहे तीन दिवसीय कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस कार्यक्रम के दूसरे दिन संपन्न हुए।
ऐसा ही दहेज मुक्त विवाह (रमैनी) कटनी जिले के धनीराम के पुत्र सूरज दास का भिंड जिले के लक्ष्मण की पुत्री पूजा दासी के साथ और जबलपुर जिले के राजेश दास के पुत्र विकास दास का पन्ना जिले के रामनारायण दास की पुत्री पूजा दासी के साथ संपन्न हुआ। शादी मै न कोई मेहंदी लगी, न कोई श्रृंगार किया गया तथा दूल्हा भी साधारण कपड़ों में बिना सहरे के था। दोनों परिवारों ने फिजूलखर्ची को रोकने, दिखावे को बंद करने और लोगों को जागरूक करने के लिए अपने गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को आधार बनाते हुए साधारण तरीके से अपने बच्चों के विवाह संपन्न करने का निर्णय लिया। धनीराम जी ने बताया कि समाज से दहेज रूपी दानव को जड़ से खत्म करके ही दहेज प्रथा नामक कुरीति को खत्म किया जा सकता है। इस प्रकार की शादियों में किसी का ₹1 भी खर्च नहीं होता है, जोकि समाज के लिए प्रेरणा दायक है। उन्होंने बताया कि गुरुवाणी द्वारा ऐसी शादी में वर-वधु के हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर सादगी पूर्वक विवाह करवाकर दुल्हन को मात्र एक जोड़ी कपड़ों में विदा किया जाता है। कबीरपंथी संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रभावित होकर हजारों लोग इस तरह की शादियां कर फिजूल खर्च पर लगाम लगा चुके हैं और सभी तरह की सामाजिक कुरीतियां जैसे मृत्यु भोज, नशाखोरी, रिश्वतखोरी, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, जाति प्रथा आदि से दूर हो चुके हैं। ऐसे विवाह के माध्यम से दहेज मुक्त भारत बनाने के लिए पूरे देश में जागरूकता लाई जा रही है।



