जनेकृविवि में मसाला फसलों की आधुनिक उत्पादन तकनीक

जबलपुर दर्पण । जवाहरलाल नेहरू कृ-िुनवजया वि-रु39यवविद्यालय के उद्यानिकी विभाग
कृ-िुनवजया महाविद्यालय जबलपुर के अंतर्गत एक दिवसीय कृ-ुनवजयाक प्र-िरु39याक्षण का आयोजन,एकीकृत
उद्यानकी विकास मि-रु39यान के अंतर्गत ‘‘मसाला फसलों की आधुनिक उत्पादन तकनीकएवं प्रसंस्करण तकनीक’’ वि-ुनवजयाय पर विवेकानंद सभागार में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू कृ-िुनवजया वि-रु39यवविद्यालय के कुलपति डॉ. पीके मिश्रा
ने कहा कि मसाला फसलों की खेती में हमारे किसान बहुफसली खेती के अंतर्गतअपना सकते हैं। मसाला फसलों की खेती हेतु विभिन्न प्रकार के मसाला फसलोंके प्रसंस्करण कर एवं स्टार्टअप प्रारंभ करने के साथ ही डिजिटल मार्केटिंग को
अपनाकर हमारे किसान भाई लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस कार्य हेतु जवाहरलाल नेहरू
कृ-िुनवजया वि-रु39यवविद्यालय के वैज्ञानिक सतत् तकनीकी मार्गद-रु39र्यान प्रदान कर रहे हैं, इसके
साथ ही मध्य प्रदे-रु39या सरकार एवं केंद्र सरकार विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं के माध्यम
से किसानों को पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही हैं।स्वागत उद्बोधन अधि-ुनवजयठाता उद्यानिकी संकाय डाॅ. एस. के. पांडे ने कहा कि मसाला उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदे-रु39या का एक महत्वपूर्ण स्थान है, परियोजना केअंतर्गत किसानों को मसाला खेती की उन्नत तकनीक के साथ ही साथ उन्नत-रु39याील प्रजातियों की जानकारी एवं एवं मसाला फसलों की खेती के लाभ एवं जागरूकता की दि-रु39याा में कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में वि-िरु39या-ुनवजयट अतिथि के रूप में उपस्थित
संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. दिनकर -रु39यार्मा ने कहा कि मसाला फसलों की खेती कमपानी वाले क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है। ऐसे क्षेत्र जहां किसानों के पास पानी की कम उपलब्धता है, वहां पर एक अतिरिक्त आय प्राप्त करने हेतु मसाला फसलों की खेती की जा सकती है। इसके साथ ही अधि-ुनवजयठाता कृ-िुनवजया महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. पी.वी. -रु39यार्मा ने कहा कि एकीकृत प्रक्षेत्र प्रणाली की महत्ता को किसान भाइयों को सम-हजयना होगा एवं इसकी उपयोगिता एवं आव-रु39ययकता पर विस्तार से किसानों को जानकारी प्रदान की। आपने कहा कि टमाटर,अदरक,लहसुन जैसी कई फसलों का प्रसंस्करण कर इनका उचित लाभ एवं दाम प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान विकासखंड कुंडम एवं -रु39याहपुरा विकासखंड से आए लगभग 80 से 90 महिला एवं पुरु-ुनवजया कृ-ुनवजयाकों को कुलपति डॉ. पी.के. मिश्रा द्वारा बौद्ध पौधों का वितरण किया।



