कवि प्रदीप और कवि नीरज पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

जबलपुर दर्पण। कवि प्रदीप और कवि नीरज ये दोनों ऐसे कवि हैं जो सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़े
रहे। ये दोनों ही लोकमंगल के उद्देश्यों की भली-भांति पूर्ति करते हैं। इनकी कविताएं लोकमन
को छूने वाली कविताएं हैं।” उपर्युक्त उद्गार संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो.
संजय द्विवेदी, महानिदेशक भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के द्वारा अभिव्यक्त
किए गए। संत अलॉयसियस स्वशासी महाविद्यालय, जबलपुर के हिंदी विभाग द्वारा द्वि-
दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र का प्रारंभ ईश वंदना से
किया गया इसके पश्चात अतिथियों का पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत किया गया।
तत्पश्चात कार्यक्रम की संयोजिका डॉ- अभिलाषा शुक्ला द्वारा संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश
डाला गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फा. वलन अरासू ने अपने संदेश में कहा कि “महान
साहित्यकार जीवन की विभिन्न कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरते हैं और उनके अनुभव
हमारा मार्गदर्शन करने और जीवन को आकार देने में सहायक होते हैं ।” संगोष्ठी की बीज
वक्ता प्रो. स्मृति शुक्ला, शास. मानकुंवर बाई महिला महाविद्यालय, जबलपुर का वक्तव्य अब
इस प्रकार था “कवि प्रदीप और कवि नीरज ने पीड़ित मानवता की अनुभूति को पूरी
सहृदयता के साथ अनुभव किया और जीवंतता के साथ साहित्य में प्रस्तुत किया।” कार्यक्रम
के विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक पांडे का संदेश इस प्रकार था कवि प्रदीप और नीरज ने कविता
को जन-जन तक पहुंचाया है उनका काव्य हिंदी साहित्य में अविस्मरणीय है। “कार्यक्रम के
दौरान संगोष्ठी पर आधारित पुस्तक भी विमोचित की गई। इस दौरान एक अन्य पुस्तक भी
विमोचन की गई, जिसका शीर्षक था कोविड-19 चुनौतियां एवं प्रबंधन। इसके संपादक डॉ. फा.
वलन अरासू, डॉ. अंजली डिसूजा, डॉ. दयाशंकर गौतम एवं डॉ. मंजू गुप्ता हैं। उद्घाटन सत्र के
दौरान मंच संचालन डॉक्टर स्मारिका लॉरेंस एवं सुश्री नेहा महावर के द्वारा तथा आभार प्रदर्शन
डॉ. रामेन्द्र प्रसाद ओझा के द्वारा किया गया।” कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के
उप-प्राचार्यगण डॉ. कल्लोल दास एवं डॉ. अंजली डिसूजा डॉ. रामेन्द्र प्रसाद ओझा, डॉ. कैरोलिन
सैनी, डॉ. रीना थॉमस, फा. प्रदीप रॉड्रिक्स का विशेष योगदान रहा।



