धान की जिले में कुल 171130 हैक्टेयर बोनी:उपसंचालक कृषि डॉ.एस.के निगम

आभासी कड़वा रोग एवम् झोका ब्लास्ट रोग की रोकथाम एवं उपचार की कृषि विभाग ने दी जानकारी
जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो। कृषि विभाग द्वारा जिले में खरीफ की फसल अपनी परिपक्व अवस्था में आ चुकी है। सितंबर माह के अंत तक जबलपुर में औसत के अनुरूप बारिश हो चुकी है,और उत्पादन भरपूर होने की संभावना है। उपसंचालक कृषि जबलपुर डा.एस.के निगम द्वारा दी गयी जानकारी अनुसार धान की जिले में कुल 171130 हैक्टेयर बोनी हुयी है।वि.ख.धान का रकबा जबलपुर17350 पनागर 30150, 18000, 32269 ,कुण्डम पाटन शहपुरा,13980, मझौली, सिहोरा 31500, 27885 कुल योग 171130 हैक्टेयर, धान की फसल में आभासी कडवा रोग एवं झोका या ब्लास्ट रोग की प्रारंभिक अवस्था देखी जा रही है। जिसकी रोकथाम के लिये कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.ए.के.सिंग द्वारा किसानों को सलाह दी जिसमे खेत में जल का भराव न होने दें। ट्राइसाइक्लाजोल (20.4%WP) + एजोक्सीस्ट्रोबिन (8.8%SC) 90 मिली/एकड अथवा कापर ऑक्सीक्लोराइड दवा 2.5 ग्राम प्रति ली. पानी के साथ छिड़काव कर सकते है। रोग के लक्षण दिखते ही उपरोक्त रसायनों में से किसी एक का प्रथम छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार दूसरा छिड़काव,पहले छिडकाव के 12 से 15 दिन के अंतराल पर करें। एवं झोंका या ब्लास्ट रोग में पत्तियों पर आंख के आकार के धब्बे दिखाई देते हैं, तने की गांठो व दानों पर ये धब्बे दिखाई देते है। रोग के लक्षण दिखाई देने पर ट्राइसाइक्लाजोल 75 WP अथवा प्रोपिकॉनोजोल 25 EC-1 मिली/लीटर की दर से छिड़काव करें। डॉ.इन्दिरा त्रिपाठी अनु.कृषि अघि पाटन ने कृषकों को सलाह देते हुए अनुरोध किया कि उत्तम गुणवत्तापूर्ण दवा लेवें साथ ही दवा लेते समय विक्रेता से बिल अवश्य करें। अन्य खरीफ फसलें भी अच्छी अवस्था में है। मोटे अनाज में कोदो कुटकी की फसल का क्षेत्र भी बढ़ा है। शहपुरा, पाटन क्षेत्र में मटर की बोवनी भी शुरू हो गई है. गा.कृ.वि.अधि. रजनीश दुबे ने सलाह दी है कि बीजोपचार करने के बाद ही बौनी करें। किसी भी जानकारी या सलाह के लिए विकासखंड कृषि कार्यालय में सम्पर्क करने का अनुरोध किया गया है।



