शासन प्रशासन की अजब-गजब नीति निर्देशन से शाला प्रभारी होते परेशान

जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार म. प्र. शासन स्कूल शिक्षा विभाग ने पूर्व में एक आदेश जारी कर एक शाला एक परिसर कर प्रदेश के समस्त शासकीय शालाओं को एकीकृत कर दिया,जिसमें शासन ने समस्त शालाओं के वार्षिक वित्तीय शाला रखरखाव के ख़र्च में कटौती कर दी, पूर्व में प्राथमिक ,माध्यमिक, हाई स्कूल की शाला रखरखाव हेतु पृथक -पृथक राशियां जारी होती थी किन्तु अब केवल एक राशि से शाला रखरखाव किया जाता है। वो भी साल के अंत में।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार एकीकरण के साथ ही शाला डाइस कोड भी एक कर दिया गया,किन्तु जब स्थानांतरण नीति या प्रधानमंत्री खाद्यान्न वितरण योजना या कोई अन्य जानकारी मांगी जाती है तो प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों से अलग -अलग मांगी जाती है, जबकि एकीकृत शाला है,शाला डाइस कोड एक है ,राशि भी एक जारी होती है ,तो अन्य जानकारी भी एक मांगी जाना चाहिए। जबकि शासन ने शाला डाइस कोड समाप्त कर दिया तो फिर अलग -अलग जानकारीयां क्यों मांगी जाती है, यह एक विचारणीय प्रश्न है.. कि ऐसा सिर्फ केवल वित्तीय कटौत्रा हेतु किया गया या एक इंजन से 40 डिब्बे पटरी में खींचने जैसा प्रतीत होता है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, अरविन्द विश्वकर्मा, संजय उपाध्याय, शिवेंद्र परिहार, भास्कर गुप्ता, जी आर झारिया, विश्वनाथ सिंह, आकाश भील, आदेश विश्वकर्मा, नितिन तिवारी, धर्मेंद्र परिहार, दुर्गेश खातरकर, सतीश खरे,ऋषि पाठक, अजब सिंह, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, डेलन सिंह, महेंद्र मार्को, शैलेश पंड्या, माधव पाण्डेय, रवि विश्वकर्मा, गगन पटेल, देवेंद्र राजपूत,अफ़रोज़ खान, रवि केवट, बैजनाथ यादव, आशीष यादव, आशीष विश्वकर्मा, पंकज हल्दकार, बहादुर पटेल, अजय लोधी, दिलीप साहू, अंजनी उपाध्याय, चंद्रभान साहू, विष्णु झारिया, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, महेश मेहरा, भोजराज विश्वकर्मा, राशिद अली, आसाराम झारिया, समर सिंह,राकेश मून, अजय श्रीपाल, सुरेंद्र परसते, पवन सोयाम, रामदयाल उइके, मनोज कोल, रामकिशोर इपाचे, पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, अर्चना भट्ट, रेनू बुनकर, ब्रजवती आर्मो, भागीरथी परसते, पूर्णिमा बेन, योगिता नंदेश्वर, सुमिता इंगले, कल्पना ठाकुर, अम्बिका हँतिमारे, शबनम खान, शायदा खान इत्यादि ने शासन -प्रशासन से मांग की है,कि स्पष्ट नीति निर्देश जारी करें ।



