श्रीकृष्ण नाम से ही आसुरी शक्तियों और नकारात्मक का नाश : स्वामी अशोकानंद

जबलपुर दर्पण। श्रीकृष्ण उच्चारण मात्र से ही वातावरण में मौजूद आसुरी शक्तियां और नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। पितरों को तृप्त करने के लिए हरिनाम ही है, पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा अपने ,जाने अंजाने, सभी पितरों के प्रारब्ध कर्मों का शमन होता है और यजमान केपितृदोष निवारण तक हो जाता है। श्रीमद्भागवत कथा पिछले जन्म मृत्यु के कालचक्र और रोग दोष व्यधिंयो को समाप्त कर मोक्ष की प्राप्ति होती है उक्त उद्गार भागवत सेवा समिति के तत्वावधान में भक्तिधाम आश्रम ग्वारीघाट मैं पूर्वजों के तर्पण के लिए पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा पुराण के चतुर्थ दिवस श्रीकृष्ण जन्म में व्यासपीठ से भागवताचार्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहें।
श्रीराधा-कृष्ण,व्यासपीठ , महाराज जी का पूजन अर्चन प्रदीप महाराज, पंडित वेदांत शर्मा , करिश्मा शर्मा, विध्येश भापकर, वीनू माखीजा, विजय पंजवानी, पप्पू लालवानी,उमेश पारवानी, जय बाशानि, दीपक पंजवानी, हीरा शर्मा, खेराज दास हेमराजनी ,सहित श्रृध्दालु जनों की उपस्थिति रही।



