सर्व हितकारी कार्य ही दास को बनाते हैं देवतुल्य : स्वामी अशोकानंद

जबलपुर दर्पण। पूर्वजों का आशीर्वाद और पूर्व, वर्तमान में किये गये सर्व मंगल के कार्य ही पुण्य होते हैं। पुण्य का उदय होते ही नारायण भी भक्त के चरणों में दास बनकर सेवा करते हैं। जीवन में सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना से प्रेरित होकर धर्म का पालन करनेवाले भक्त को भगवान स्वयं उच्च आसन देते हैं। श्रीमद्भागवत कथा का सार ही है की संपूर्ण जगत के कल्याण हेतु कार्य करते हुए श्रीहरि चरणों में समर्पित हो जाना, सर्व हितकारी कार्य ही दास को देवतुल्य बनाते हैं।
उक्त उद्गार भागवत सेवा समिति के तत्वावधान में भक्तिधाम आश्रम ग्वारीघाट मैं पूर्वजों के तर्पण के लिए पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा पुराण के सप्तम दिवस श्रीकृष्ण रूक्मणी मंगल में व्यासपीठ से भागवताचार्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहें।
श्रीराधा-कृष्ण,व्यासपीठ , महाराज जी का पूजन अर्चन पंडित वेदांत शर्मा , करिश्मा शर्मा, आचार्य चंद्रिका प्रसाद,
लालू महाराज, पुष्प राज तिवारी,वीनू माखीजा, विजय पंजवानी, पप्पू लालवानी,उमेश पारवानी, जय बाशानि, दीपक पंजवानी, हीरा शर्मा, खेराज दास हेमराजनी ,सहित श्रृध्दालु जनों की उपस्थिति रही।



