नदिया बिगड़ी, भटियाँ बिगड़ी, बिगड़े जंगल और पहाड़। भू माफिया कर रहे प्रकृति का विनाश

जबलपुर दर्पण। सिहोरा तहसील जबलपुर जिले का सबसे बड़ा खनन अड्डा बन गया है। लोगों का कहना है कि भू माफिया बाहुबलियों के कारण कोई प्रशासनिक अधिकारी खनन कार्यवाही नहीं कर पा रहे है। हालांकि जमीन का खनन हो या नदियों का आखिर प्रकृति का दोहन तो हो रहा हैं। जिसका जिम्मेदार मानव समाज है। जिसका परिणाम है कि तीन ऋतुऐं ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, ठंड रितु, मनुष्य के दैनिक जीवन के प्रभावित कर रही है। आखिर भू माफिया व प्रशासनिक अधिकारी क्यों नहीं समझ पा रहे हैं कि आने वाले 20 वर्ष मै विनाशकारी समय को आमंत्रित किया जा रहा है। सिहोरा तहसील की जनता प्रश्न पूछती है, क्या भू माफिया व प्रशासनिक अधिकारी भगवान व प्रकृति को नहीं मानते, क्या इनका दीन व धर्म मात्र पैसा है। भगवान से निर्मित नदियां, पहाड़, जंगलों को क्या विनाश करने का कसम खा रखा है। हाला कि यह वेदना सामने तब आई जब रमखिरिया-कटरा के जनप्रतिनिधी व ग्रामवासियों ने सिहोरा जाकर एसडीएम कार्यालय में अपनी दुखद कहानी व्यक्त किया। और बताया कि स्टाप-डेम व खेल मैदान के आसपास रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि उसी ग्राम पंचायत अंतर्गत देवरी में मुक्तिधाम, वृक्षारोपण, एवं पहुंच मार्ग के आसपास रेत खनन का बहुत अधिक रेत खनन किया जा चुका है। हालांकि जनप्रतिनिधि व ग्रामवासी करीब 4 माह से एसडीएम कार्यालय का चक्कर लगा रहे है। रेत खनन रोकने की गुहार लगा रहे हैं। परंतु प्रशासनिक अधिकारी कार्यवाही करने की झूठी दिलासा देकर उन्हें टाल देते हैं। भू माफिया इसी बात पर अवैध खनन का भरपूर लाभ उठाते रहते है। जनप्रतिनिधियों व ग्राम वासियों ने रेत खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग किया है।



