गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरुदेव ब्रह्मलीन आदर्श मुनि त्रिवेदी व गुरुमाता को स्मरण किया विप्रा शक्तिं ने

जबलपुर। गुरु पूर्णिमा की पावन बेला में जब पृथ्वी गुरु-कृपा के आशीषों से आप्लावित होती है , मध्य प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा की नारी इकाई “विप्रा शक्ति” ने शतक्रतु आश्रम , दमोहनाका के पावन प्रांगण में गुरुवर ब्रह्मलीन आदर्श मुनि त्रिवेदी और गुरु माता ब्रह्मलीन श्रीमति कामिनी त्रिवेदी के तैलचित्र के समक्ष श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनकी अमर स्मृतियों को नमन किया। शतक्रतु आश्रम का आँगन गुरु पूर्णिमा में गुरु-धाम हो उठा।
इस अवसर पर विप्रा शक्ति की श्रीमति शक्ति त्रिवेदी ने गुरुवर को स्मरण करते हुए कहा कि जब गुरु पूर्णिमा आती है, विप्रा शक्ति की सदस्य उन दोनों के चरणों में फूल के साथ साथ श्रद्धा का व्रत रख आती हैं , क्योंकि फूल तो कुंचित हो जाते हैं, पर व्रत का तेज कभी मुरझाता नहीं।
श्रीमति अनुभा पाठक ने स्मरण करते हुए कहा कि गुरुवर जो मार्ग दिखाते थे , गुरुमाता उस मार्ग पर चलने की कीमत समझाती थीं ।”गुरुवर की छाया में गुरु माता श्रीमति कामिनी त्रिवेदी की छाया एसी थी , जैसे तुलसी के पौधे के पास चौरा होता है, वैसे ही गुरु के तप के पास गुरुमाता का स्नेहसिक्त ममतामयी आश्रय था ।
श्रीमति गरिमा शुक्ला ने कहा कि गुरुवर ने जहाँ विप्र समाज को एकता का मंत्र दिया, वहीं गुरुमाता कामिनी जी ने उस मंत्र को घर-घर नारी शक्ति के मध्य पहुँचाया। दोनों ने सनातन को “एकात्मता” का अमृत पिलाया। अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि “गुरु वही है जो अंधकार में दीपक बन जाए, भटकते जीवन को दिशा दे।” गुरुवर ब्रह्मलीन आदर्श मुनि त्रिवेदी ने न केवल महासभा के कंटकाकीर्ण मार्गों को दीपस्तंभ की भाँति प्रकाशित किया, अपितु विप्र समाज के उत्थान के साथ-साथ सम्पूर्ण सनातन धर्म को “एकता” का अमर सन्देश दिया। आज भी उनकी वाणी की पावन धारा विप्रा शक्ति के हृदय को सिंचित कर उसे कर्तव्यपथ पर अग्रसर कर रही है।
इस पुण्य अवसर पर विप्रा शक्ति की संयोजिका श्रीमति शक्ति त्रिवेदी के सान्निध्य में श्रीमति अनुभा पाठक, श्रीमति नीलू तिवारी, श्रीमति गरिमा शुक्ला, श्रीमति वंशिका टेहेनगुरिया आदि विप्र देवियाँ उपस्थित थीं। सभी ने गुरुवर के प्रति अपनी अक्षुण्ण श्रद्धा को पुष्पों के माध्यम से अभिव्यक्त कर आत्मिक प्रकाश की कामना की।



