समाज निर्माण में मां की भूमिका है अहम:अनिरुद्धाचार्य

जबलपुर दर्पण। हमने मदर्स डे पर खास लोगों से बात की, जिन्होंने आज खुद को बुलंदियों तक पहुंचा दिया है। हम बात कर रहे हैं सेवा की प्रतिमूर्ति अनिरूद्धाचार्य महाराज की जिन्होंने मातृ दिवस के उपलक्ष्य में मातृ गौरव संवाद आयोजन के दौरान बताया कि मां अतुलनीय है, उसकी दुनिया में किसी से तुलना नहीं की जा सकती है। मैंने बचपन से ही अपनी मां से प्रेरणा ली थी कि मैं आपके जैसे अनेकों दुखित मांओं और वृद्धों की सेवा करना चाहता हूं। आज मैं जिस मुकाम पर हूं उसमें मेरी मां का पूरा योगदान है। मां ने कहा था कि तुम्हें सेवावीर बनना है। जब वृद्धाश्रम की नींव रखी गई तब मां की आंखों में एक तरफ खुशी के आंसू थे। मैं आज जो कुछ भी हूं मेरी मां की वजह से, आज की पीढ़ी अपने गंदे हुसूलों को थामकर दुर्गारूपी मांओं को घर से बाहर निकाल देते हैं जबकि समाज के निर्माण में मां की भूमिका ही श्रेष्ठ है। वक्तव्य के दौरान महाराज जी ने नम आंखों के साथ कहा कि मैं लोगों से आज के दिन आह्वान करना चाहूंगा कि अपनी मां को ही देवता समझकर पूजा करें क्योंकि मां से ही देवता का प्राकट्य होता है। दुनिया की हर मां को मेरा सलाम। अवसर पर प्रमुख रूप से साध्वी शोभा दीदी, मानसाचार्य, दुर्गेश पंडा, राघव राघवेंद्र महाराज, कृपालु महाराज, रामचरण महाराज, सौरभ पंडा, कपिल गंग देव, श्रद्धालुगण आदि उपस्थित थे।



