जबलपुर दर्पण

जल संरक्षण के प्राचीन कुआं आज भी अपेक्षा के शिकार

सुरक्षा व्यवस्था बचाव के आवेदनों का क्यों नहीं होता सही पालन, निरीक्षण करने वाले भी झूठी जानकारी दे कर निकाल लेते अपना काम ?

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र गांधी ग्राम ( बुढाग़र) जनपद पंचायत सिहोरा अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में पुराने तालाब, प्राचीन कुआं एवं बावली के साथ साथ मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था अब सवालिया निशान खड़े कर रहीं हैं?
जल गंगा मिशन के बाद निकली तस्वीरें और अधूरे कार्य, स्थानीय प्रशासन के ऊपर उठते सवाल?
आवेदन कर्ता की मांग – ग्राम पंचायत गांधी ग्राम में वार्ड नंबर 5 में स्थित प्राचीन शिव मंदिर एवं 200 वर्ष पुराना कुएं का अस्तित्व खतरे में होने के कारण यह विलुप्त होते चले जा रहे हैं। उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गांव के लोगों ने सिहोरा मुख्यालय में एवं ग्राम पंचायत गांधी ग्राम बुढ़ाग़र में लिखित रूप से दो माह पहले आवेदन दिया हुआ था। इन्होंने अपने आवेदन में बताया कि पुराने नेशनल हाईवे 7 सड़क मार्ग गांधीग्राम अंतर्गत जीएस मार्केट के सामने बने प्राचीन शिव मंदिर एवं कुआं जिसे कलारन का मंदिर कलारन का कुआं के नाम से प्रसिद्ध और जाना जाता है। इस मंदिर कुआं के आवागमन पर गांव के किसी व्यक्ति द्वारा रास्ता बंद करने एवं मंदिर के पास अवैध निर्माण कर इन दोनों धारों को नष्ट करने के लिए अथक प्रयास किया जा रहे हैं। इन दोनों प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए ग्राम पंचायत के निवासियों ने लिखित रूप से जनपद पंचायत सिहोरा एवं ग्राम पंचायत बुढ़ाग़र को आवेदन दिया था।
लेकिन आवेदन देने के बाद भी कोई ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत द्वारा कार्यवाही नहीं की गई।
क्या मध्यप्रदेश शासन द्वारा मुख्यालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों को बिना कार्य के वेतन दे रहे हैं।

क्यों शिकायत कर्ता ने मीडिया को बताई आप बीती –
हालही में ग्राम पंचायत गांधी ग्राम बुढ़ाग़र में बीते माह 26/03/2026 मार्च को ग्रामीणों द्वारा लिखित रूप से आवेदन मुख्यालय में जिम्मेदारी के अधिकारियों को दिये गए थे। लेकिन विगत दो माह बीत जाने के बाद भी सम्बन्धित अधिकारियों को आवेदन के बारे में जानकारी भी नहीं हैं कि हमारे कार्यालय में कोई आवेदन आया हुआ हैं।
जब अधिकारी केवल बैठक एवं वीडियो कॉन्फेंस में कई घंटों तक व्यस्त रहते हैं और जब इन शिकायतों का अवलोकन ही नहीं कर पाते हैं तो आवेदन कर्ता आखिर क्या करें।
जिम्मेदारी की हद एवं समय सीमा की बात ही फिर अलग है। जिले से लेकर ग्रामीण अंचलों में बैठे हुए उच्च स्तरीय अधिकारियों को इस ओर अथक परिश्रम एवं प्रयास की जरूरत है।
आने वाले समय की स्थिति हो सकती हैं गम्भीर – प्राचीन धरोहर विरासत में मिली हैं इसका मतलब ये नहीं कि हम इन्हें यूहीं नष्ट और विलुप्त होने दे। आज जल की समस्याओं को लेकर भारत सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं को नाम देकर अपना काम जरूर निकाल लेती हैं। पर कभी इन छोटी छोटी सी गम्भीर स्थिति में उसे नजर अंदाज कर देती हैं।
इन्हें बचाने की अधिक जरूरत – प्राचीन तालाब, कुआं, बावली, एवं मंदिरों को बचाने के लिए जागरूक हो कर कार्य करना ही हमारी सबसे बडी जिम्मेदारी कहलाती हैं। जिस प्रकार से मानव अपनी जरूरतों के लिए इन प्राचीन धरोहर को नष्ट एवं विलुप्त तेजी से करता चला जा रहा हैं। और धरती माता का सीना भी छल्ली कर 200,400,1000 फिट बोरिंग कर पानी की सुविधाएं बना रहा हैं। आने वाला समय बड़ा ही गम्भीर हो सकता हैं। जल हैं तो कल है वरना जीवन हमारा पानी के बिना व्यर्थ है।
जिला स्तर प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन से ग्रामीणों ने मांग रखीं की इनकी सुरक्षा व्यवस्था जल्द कराई जाए। और अवैध निर्माण करता के ऊपर उचित कार्यवाही की जाए।

क्या हैं नियम और इनकी व्यवस्था के आधार हमारे भारत में तालाब और कुआं जैसे जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, और भारतीय न्याय संहिता/दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कड़े कानून हैं। इनके तहत जल निकायों का अतिक्रमण, प्रदूषण, या उन्हें नष्ट करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान भी है।
कार्यवाही कैसे करें?
ग्राम पंचायत/नगर निगम: यदि कोई तालाब भर रहा है या गंदा कर रहा है, तो तत्काल स्थानीय निकाय को लिखित शिकायत करें।
जिला मजिस्ट्रेट- अतिक्रमण की स्थिति में डीएमको सूचित किया जा सकता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण: जल निकाय के पारिस्थितिक विनाश के खिलाफ एनजीटी में जनहित याचिका (PIL) दायर की जा सकती है।
यदि आपके कार्य क्षेत्र में ऐसा कोई मामला है, तो स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायत करना पहला कदम होना चाहिए। यदि आवश्यक हो, तो एनजीटी का रुख भी किया जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88