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बाॅलीवुड के बेरोजगार परेशान फोटोग्राफर्स कर सकते हैं आत्मदाह

सिने स्टिल फोटोग्राफर्स को शूटिंग की गाइडलाइन में नहीं किया शामिल?


शामी एम् इरफ़ान की रिपोर्ट, मुम्बई।
                        कोरोना महामारी का भय और लाॅकडाउन के कारण बंद पड़े कामकाज सशर्त पुनः शुरू होने के आसार दिखने लगे हैं। बाॅलीवुड में भी शूटिंग आदि कार्य शुरू होने के संकेत मिले हैं। यह सब लाॅकडाउन के चौथे चरण की गतिविधियां हैं। जब प्रोड्यूसर्स गिल्ड व फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज के प्रमुखों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे से बातचीत की और शीघ्र ही शूटिंग शुरू करने और शूटिंग शुरू करने के लिए तिथि बताने का आश्वासन दिया गया। शूटिंग के लिए बनी गाइडलाइन को प्रदेश सरकार ने मंजूरी भी प्रदान की। इस गाइडलाइन को लेकर सिने स्टिल फोटोग्राफर्स में रोष व्याप्त है, क्योंकि गाइडलाइन में फोटोग्राफरों को काम देने का जिक्र ही नहीं है।
                      बाॅलीवुड में कुछ ही विभाग ऐसे हैं, जिनकी अपनी कोई ऐक्टिव यूनियन नहीं है। अन्यथा सभी की अपनी यूनियन है और 32 संगठनों की मदर बाॅडी फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज है, जिसके प्रेसिडेंट बी एन तिवारी, जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे और ट्रेजरार गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव (संजय) तथा मुख्य सलाहकार अशोक पंडित हैं। जो अपने बत्तीस संगठनों से विचार-विमर्श करके फिल्म उद्योग की भलाई के लिए रूपरेखा तय करते हैं। उन बत्तीस संगठनों में सिने स्टिल फोटोग्राफर्स एसोसिएशन भी एक है। अपने ही लोगों को गाइडलाइन में शामिल करना भूल गए हैरानी की बात है या जान-बूझकर ऐसा किया गया है, बहुत ही गंभीर प्रश्न है।
                  सिने स्टिल फोटोग्राफर्स एसोसिएशन में कुल 635 सदस्य हैं और इसके प्रेसीडेंट एच ए पाटिल के अनुसार पांच सौ से ज्यादा लोग ऐक्टिव हैं। कदाचित पाटिल का पेट भरा हुआ है, इस लिए अपनी यूनियन के दूसरे सदस्यों की भूख-परेशानी पाटिल को नजर नहीं आती। वह बात-बात में अशोक पंडित का गुणगान करने लगते हैं और अपने संघर्ष के दिनों की कहानी बताने लगते हैं। उनसे फोटोग्राफर्स में गाइडलाइन को लेकर व्याप्त आक्रोश के सम्बन्ध में पूछने पर धाराप्रवाह कहते हैं कि, “वह एक कमीना कुन्दन गोस्वामी है, वही सब करा रहा है। शूटिंग शुरू होगी तो सबको काम दिया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है, काम करने के लिये कोई मना नहीं कर सकता। बच्चे हैं बेकार की बात कर रहे हैं।”
                      लाॅकडाउन के दौरान इस संगठन के मात्र साठ सदस्यों को राशन सामग्री व आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है। सूूत्रों से मिलीी जानकारी के अनुसार सलमान खान की बीइंग ह्यूमन के द्वारा तीन-तीन हजार रुपये दिये गये और साठ सदस्यों को ही राशन सामग्री/ कूपन दिये गये हैं। अपनी एसोसिएशन से किस सदस्य की हेल्प की, इसका जवाब पाटिल साहब के पास नहीं है। अगर पांच सौ भी ऐक्टिव मेम्बर हैं तो, जिनके पास काम नहीं, पैसे नहीं वह बेचारे क्या करें? कुछ ऐसे भी फोटोग्राफर मेरी जानकारी में हैं, जिन्होंने रोजी (काम) ना होने के कारण इस लाॅकडाउन में रोटी के लिए अपना कैमरा बेंच दिया है। कुछेक फोटोग्राफर के नाम भी सोशल मीडिया पर सामने आये हैं, जो लाॅकडाउन में आर्थिक तंगी से परेशान होकर सब्जी बेचने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक फोटोग्राफर अशोक सिंह है, जो इन दिनों सब्जी बेचकर अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है।               
                   सिने स्टिल टीवी एण्ड मोशन फोटोग्राफर एसोसिएसन के प्रेसिडेंट एच ए पाटिल से अशोक सिंह जैसे फोटोग्राफर्स के बारे मे बात करने पर वह कहते हैं कि “उनको काम ही नहीं आता और फोटोग्राफर बनते हैं। मैंने ‘हमराज’ फिल्म से फोटोग्राफी शुरू की थी, बहुत सीनियर फोटोग्राफर हूँ। पांच- साढे पांच हजार चार्ज करता हूँ। यह लोग डेढ हजार लेकर काम करते हैं, किसी काम में इन्हें भेजो तो सही फोटो नहीं निकालते और नुकसान हो जाता है।” जिनको फोटोग्राफी नहीं आती उन्हे आप अपनी एसोसिएशन का मेम्बर क्यों बनाते हैं? सवाल का संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। बल्कि उन्होंने यह कहा कि, “ऐसे लोगों को किसी का असिस्टेंट बनकर काम करना चाहिए।”
                  एसोसिएशन के कई मेंबरों से बात करने का प्रयास किया है मैने। अधिकांश लोगों ने फोन काॅल रिसीव ही नहीं किया। जो सक्षम हैं या जो किसी लफडा में नहीं पड़ना चाहते, वह भी चाहते हैं कि शूटिंग के लिए बनी गाइडलाइन में फोटोग्राफरों को शामिल किया जाये लेकिन खुलकर सामने नहीं आना चाहते। इस लिए जिनसे मेरी बात हुई है, उन लोगों का नाम देना गलत होगा। क्योंकि उन्हें खतरा है कि, नाम आने से प्रोडक्शन हाउस उनको काम नहीं देंगे। साफ तौर पर जाहिर है कि, यूनियन और फेडरेशन के प्रमुखों ने हर जगह मनमानी की है, पक्षपात किया है। अब अगर फोटोग्राफर्स अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करते हैं और गाइडलाइन में फोटोग्राफरों को हक नहीं मिलता तो डिप्रेशन में आकर कोई एक भी फोटोग्राफर आत्मदाह कर लेता है तो धमकी सच हो जाएगी और तथाकथित फिल्मी लीडरों पर बहुत बड़ा कलंक लगेगा। समय पर सम्बन्धित लोगों को विचार करना अति आवश्यक है। फिलहाल तीस जून को लाॅकडाउन का पांचवां चरण समाप्त होंगा। एक महीने बाद ही शूटिंग कार्य आरम्भ होने के संकेत हैं।
                फिल्म जगत के इन फोटोग्राफर्स में सिर्फ दो लोग रमाकांत मुन्डे और राजेश कुरील ऐसे हैं, जो मीडिया फोटो जर्नलिस्ट्स के रूप में भी ऐक्टिव रहते हैं। रमाकांत मुन्डे अपनी एसोसिएशन के प्रचारक की जिम्मेदारी भी संभालते हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हैं। लेकिन राजेश कुरील की हालत दयनीय है। तीन महीने से रूम का किराया, लाइट व पानी का बिल अदा नहीं कर पाया है। जिसका काम किया था, वहाँ से उसे पैसे नहीं मिले। इस लाॅकडाउन के दौरान वह कुछ ज्यादा परेशान हो गया है और पहले चरण में ही सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी बातें शेयर की थी कि, झोला लेकर घर भागना पड़ेगा। फिर भी मुम्बई में रहकर जीविका हेतु लड़ रहा है और अपने अधिकारों के लिए अभी भी संघर्षरत है।
अंत में यह भी बता दें कि, कुन्दन गोस्वामी एक वरिष्ठ फोटोग्राफर हैं और इस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी। पिछले इलेक्शन में उन्होंने चुनाव ही नहीं लड़ा। वह हमेशा न्याय की बात करते हैं और इतने विनम्र हैं कि उनकी जुबान से अपशब्द शायद ही किसी ने सुना हो। जहाँ तक मेरी जानकारी है पाटिल जी उन लोगों के साथी हैं, जो शूटिंग के दौरान सेट पर कामगारों के कार्ड चेक करने भी जाया करते थे। अगर मैं गलत नहीं हूँ तो, अभिनेत्री कैटरीना कैफ पर पचास हजार का फाइन मारने वाले एच ए पाटिल जी थे और बाॅलीवुड स्टार सलमान खान के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था। क्योंकि उस समय वह बाॅलीवुड में नई थी, सिन्टा की सदस्यता हेतु आवेदन कर रखा था। (वनअप रिलेशंस)
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शामी एम् इरफ़ान (+919892046798) 
वनअप रिलेशंस न्यूज एंड फीचर्स सर्विस, मुम्बई।

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