नर्मदा नदी का जीवन क्षेत्र संरक्षित हो

नर्मदा मिशन की मुहिम पर कोर्ट ने लगाई मोहर।
जबलपुर दर्पण। एक तरफ तो सनातन संस्कृति में नदियों को मां कहा जाता है और उनकी पूजा की जाती है। लेकिन दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं। जो अपने लालच के चलते, मां नर्मदा की जीवन रेखा को तोड़ने पर तुले हुए हैं। मां नर्मदा गुजरात के जिस से समुद्र से मिलती है। वहां से 70 से 80 किलोमीटर पहले ही उसकी धार लुप्त हो जाती हैं। अमरकंटक से चलने के बाद कई जगहों पर मां नर्मदा की धार टूट जाती है। मां नर्मदा की जीवन रेखा को बचाने के लिए, नर्मदा मिशन एक मुहिम चलाई है। जो मां नर्मदा के संरक्षण संवर्धन की दिशा में, लगातार कार्य कर रही हैं और विगत 153 दिनों से नर्मदा मिशन के भैया जी सरकार, लगातार अनशन कर रहे हैं। विगत 16 मार्च को इस दिशा में, माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए। नर्मदा नदी की संपूर्ण उच्चतम बाढ़ सीमा से 300 मीटर तक, किसी भी तरह के निर्माण पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। 1 अक्टूबर 2008 के बाद किए गए सभी निर्माण को हटाने का आदेश दिया गया है और इस विषय में कलेक्टर, नगर निगम और एसपी की संयुक्त टीम को, कार्यवाही करने की और पूरी घटना कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराने के लिए आदेशित किया है। इस कार्यवाही के लिए 2 महीने की समय सीमा भी निर्धारित की है। कोर्ट के आदेश से अवैध निर्माण करने वाले अतिक्रमणकारियों और संस्थानों पर लगाम लगेगी। राज्य शासन ने कोर्ट में एक रिपोर्ट पेश की थी। जिसके तहत यह कहा गया था कि ये निर्माण, एचएफएल क्षेत्र से बाहर हैं। जिसे उच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया और दयोदय के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया है और इस निर्माण को सख्ती से हटाने के आदेश दिए हैं। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार दिनांक 30/03/2019 को तहसीलदार,आर आई, पटवारी की टीम ने निरीक्षण किया और 1/6/ 2019 को रिपोर्ट प्रस्तुत की और उसमें लिखा कि रेस्पोंडेंट नंबर 9 का निर्माण 300 मी. के दायरे से बाहर हैं। परंतु दिनांक 5/7/2019 को माननीय उच्च न्यायालय ने, अपने आदेश में इस रिपोर्ट को अस्वीकार किया और यह बताया कि 300 मीटर, की नदी के जल स्तर से ली गई है। जबकि दूरी कानून के अनुसार यह 300 मीटर की उच्चतम बाल सीमा के चिन्ह से शुरू होनी थी। माननीय उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया कि, नर्मदा नदी की संपूर्ण सीमा में, 300 मीटर के अतिक्रमण और निर्माण कार्यों की की गई कार्रवाई की, रिपोर्ट प्रस्तुत करें। दिनांक 16 /8 /2019 को एसडीएम द्वारा के अवैध निर्माण को तुरंत रोकने का आदेश दिया था और इसी तरह 21/8 /2019 को माननीय उच्च न्यायालय ने, आदेश में दोबारा इसी बात को दोहराया और यह निर्देश दिया कि 300 मीटर में, आगे से कोई भी नया निर्माण कराए जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। अगर नौ नंबर रेस्पोडेंट में कोई भी निर्माण करता है तो स्टेट अथॉरिटी तुरंत एक्शन ले कर निर्माण को रोकेगी। इस बात की जानकारी एक पत्रकार वार्ता के दौरान नर्मदा मिशन के और से भैया जी सरकार ने पत्रकारों को दी। इस अवसर पर भरत सिंह यादव, शिव यादव और उच्च न्यायालय में नर्मदा मिशन के उद्देश्य की पैरवी कर रहे, वकीलों की टीम मौजूद रही।



