नैतिक शिक्षा से ही चरित्र का निर्माण होगा-भगवान भाई

जबलपुर दर्पण। आज के बच्चे कल का भावी समाज हैं। अगर कल के भावी समाज को अच्छा देखना चाहते हो तो वर्तमान के युवाओं को नैतिक सद्गुणों की शिक्षा की आधार से चरित्रवान बनाए। तब समाज बेहतर बन सकता है। गुणवान व चरित्रवान बच्चे देशकी सच्ची सम्पत्ति हैं । हमारे मूल्य हमारी विरासत है। मूल्य की संस्कृति के कारण भारत की पूरे विश्व में पहचान है। इसलिए नैतिक मूल्य, मानवीय मूल्यों की पुर्नस्थापना के लिए सभी को सामूहिक रूप में प्रयास करने चाहिए। उक्त उदगार माउंट आबू राजस्थान से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहे | वे शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय , करौदीग्राम और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गणेशगंज में छात्र ,छात्राए और शिक्षको को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर बोल रहे थे |
उन्होंने बताया कि ऐसे गुणवान और चरित्रवान बच्चे देश और समाज के लिए कुछ रचनात्मककार्य कर सकते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति को याद दिलाते हुए कहा कि प्राचीन संस्कृति आध्यात्मिकता की रही जिस कारण प्राचीन मानव भी वंदनीय और पूजनीय रहा। उन्होंने बताया कि नैतिक शिक्षा से ही मानव के व्यवहार में निखार लाता है।
ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि वर्तमान समय कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है।आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सिनेमा, मोबाईल , इन्टरनेट व टीवी. के माध्यम से युवा पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का आघात हो रहा है। इस आघात से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाए, तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे। कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रिंसिपल जे. पी. झारिया जी ने भी अपना उद्बोधन देते हुए कहा की नैतिक शिक्षा से ही छात्र-छात्राओं में सशक्तिकरण आ सकता है। उन्होंने आगे बताया कि नैतिकता के बिना जीवन अंधकार में हैं। नैतिक मूल्यों की कमी के कारण अज्ञानता, सामाजिक, कुरीतियां व्यसन, नशा, व्यभिचार आदि के कारण समाज पतन की ओर जाता है |
प्रिंसिपल दुर्गा सिंह जी ने बच्चो को सुनी हुए बातो को अमल में आने का अनुरोध किया |
स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवाकेंद्र , रांझी की प्रभारी बी के गीता बहन जी ने भी अपना उद्बोधन दिया और कहा की जब तक जीवन में आध्यात्मिकता नही है तब तक जीवन में नैतिकता नही आती है आध्यात्मिकता की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा की स्वयं को जानना .पिता परमात्मा को जानना उर उसको याद करना ही आध्यात्मिकता है जिसको राजयोग कहते है |राजयोग को अपनी दिनचर्या का अंग बनाने की अपील किया|
बी के भगवान भाई जी ने भगवान भाई का परिचय देते हुए कहा कि भगवान भाई ने 5000 से अधिक स्कुलो में और 800 अधिक जेलों (काराग्रह) नैतिक शिक्षा का पाठ पढाया है जिस कारण उनका नाम इण्डिया बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज हुआ है |
कार्यक्रम की शुरुवात में गुलदस्ता से सभी का स्वागत किया गया | सरस्वती माँ कि वन्दना भी की गयी |
अंत में बी के भगवान भाई जी ने मन की एकाग्रता बढाने हेतु राजयोग मेंडिटेशन भी कराया |
कार्यक्रम में बी के मुलचंद भाई बी के संतोष भाई , संजय दुबे आदि शिक्षक उपस्थित थे |



