जनरेशन कंपनी मे ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से नवीन इकाई स्थापना

जबलपुर दर्पण। म.प्र. की विद्युत कंपनियों मे हो रहे निजीकरण प्रक्रिया (जनरेशन कंपनी मे ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से नवीन इकाई स्थापना, ट्रांसमीसन कंपनी मे टी. बी. सी. बी. एवं वितरण कंपनियों में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल) पर रोक लगाते हुए मध्य प्रदेश के उर्जा विभाग की उत्तरवर्ती कंपनियों के पूर्ण स्वामित्व मे अधोसंरचना स्थापित की जाने एवं विद्युत विभाग के कार्मिकों कि विभिन्न जायज मांगे सरकार द्वारा सहर्स स्वीकार की जाने बाबत ।
‘मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल अभियंता संघ’ प्रदेश के ऊर्जा विभाग की समस्त उत्तरवर्ती कम्पनियों में कार्यरत सहायक अभियंता से लेकर कार्यपालक निदेशक तक के अधिकारियों का एक मात्र संगठन हैं एवं ‘आल इंडिया पॉवर इंजिनिर्स फेडरेसन से सम्बंधित है । के आह्वान पर के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र दुबेजी का आगमन आज दिनाकं:27/06/23 को जबलपुर में हुआ । उनके द्वारा प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से प्रदेश कि विद्युत व्यवस्था को सुचारू रूप से अनवरत जारी रखने हेतु प्रशासन के समक्ष अपने विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किये एवं कम्पनियों के समस्त कार्मिकों कि समस्याओ और उचित माँगों के संबंध में प्रशासन को अवगत करते हुए सार्थक समाधान हेतु विनम्र अनुरोध किया, जो कि निम्न प्रकार हैं :
AIPEF के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र दुबेजी द्वारा बताया गया कि मध्य प्रदेश शासन के उपक्रम ‘मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड’ मे अमरकंटक ताप विद्युत गृह के अंतर्गत नवीन इकाई (लागत रु 5000 करोड़) की स्थापना मात्र रु 250 करोड़ हेतु MPPGCL द्वारा(प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी) के साथ (जॉइंट वेंचर अग्रीमेंट) हस्ताक्षरित कर एक नवीन प्राइवेट लि. कम्पनी का गठन कर निर्माण करने का निर्णय लिया गया है । जबकि ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा गठित कमेटी द्वारा वर्ष 2018 में जारी अपनी रिपोर्ट में वर्ष 2024-25 से वर्ष 2027-28 तक के कालखंड में प्रदेश में 660MW की चार नवीन ताप विदयुत ग्रहों के निर्माण की अनुशंसा की गयी थी एवं यह स्पष्ट उल्लेखित किया गया था की इसमें से दो इकाइयों का निर्माण मध्य प्रदेश विदयुत उत्पादन कंपनी द्वारा अनिवार्य होगा ।
उपरोक्त के अतिरिक्त श्री शैलेन्द्र दुबेजी द्वारा मध्य प्रदेश में किये जा रहे जॉइंट वेंचर के सम्बन्ध में कुछ ऐसे तथ्य प्रस्तुत किये गए जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, जैसे कि मात्र रु 250/- करोड़ (जबकि इससे अधिक तो म.प्र. कि उत्पादन कम्पनी अपना लाभ राइटआफ कर रही हैं) हेतु के साथ जॉइंट वेंचर का गठन, जिससे मध्य प्रदेश शासन को लगभग रु 131 करोड का सालाना अतिरिक्त भार वहन करना होगा एवं प्रदेश कि जनता को 40-50 पैसे प्रति यूनिट बिजली महेंगी मिलेगी । आने वाले 25 वर्षों में यह भार कुल 2500/- (लगभग) करोड़ तक होगा । इसके अतिररिक्त परियोजना हेतु लग-भग 247 एकड़ (100 हेक्टेयर) जमीन कि आवश्यकता है जोकि मध्य प्रदेश शासन कि उत्तरवर्ती कंपनी पसेसन में उपलब्ध है जिसे कलेक्टर गाइड लाइन रेट पे जॉइंट वेंचर कम्पनी के नाम पे स्थानान्तरण किया जा रहा है । किन्तु एक बार जॉइंट वेंचर कम्पनी के नाम पे भूमि स्थानान्तरण उपरान्त यदि किसी कारण वस् JV कंपनी को समाप्त किया जाता है, उस परिस्थिति में यह भूमि का बिग-4 कंपनियों द्वारा मूल्याकन कराकर उस वक्त कि वर्तमान मार्केट मूल्य पर लिया जायेगा, जिससे मध्य प्रदेश शासन को भारी राजस्व कि हानि होगी ।
साथ ही श्री शैलेन्द्र दुबेजी द्वारा बताया गया कि विद्युत मंत्रालय; भारत सरकार द्वारा दिसम्बर 2010 में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 के सेक्शन 3 के तहत “विद्युत टैरिफ पालिसी” का स्पष्टीकरण जारी किया गया था, जिसके अनुसार “मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार के मामलों को छोड़कर या जहां एक चिन्हित विकासकर्ता के रूप में राज्य नियंत्रित/स्वामित्व वाली कंपनी है और जहां नियामकों को मानदंडों के आधार पर टैरिफ निर्धारण का सहारा लेने की आवश्यकता होगी, को छोड़कर बिजली की सभी भविष्य की आवश्यकता को वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा प्रतिस्पर्धात्मक रूप से खरीदा जाना चाहिए”
अत: गौर किया जाना चाहिए कि कथित अमरकंटक नवीन परियोजना हेतुविद्युत क्रय अनुबंध अनुमति) ‘राज्य नियंत्रित/स्वामित्व वाली कंपनी’ होने एवं ‘मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार’ के कारण ही प्राप्त हुआ है, जिसे एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर स्थानांतरित कदापि नहीं किया जा सकता है, अन्यथा कि स्थिति में यह विद्युत मंत्रालय; भारत सरकार के उल्लेखित नियम का खुला उलंघन होगा ।
श्री दुबे ने यह भी बताया कि परियोजना से उत्पादित होने वाली विद्युत का 100% क्रय का अनुबंध की स्वीकृति द्वारा सेवानिव्रत की गयी इकाइयों [(1X20+1X30+2X120=290 MW)] के एवज में इसलिए दिया गया चूँकि प्रदेश कि उच्चतम विद्युत मांग का 30% शासन कि हिस्सेदारी होना अनिवार्य है । इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 अनुसार कार्मिकों कि सेवाशर्तें (जैसे कि उनकी तन्खा, भत्ते, पदोन्नति एवं छुटियाँ आदि) सुरक्षित रखना अनिवार्य है किन्तु उपरोक्त जॉइंट वेंचर कम्पनी हेतु मध्य प्रदेश कि उत्पादन कम्पनी के सेवानिव्रत इकाइयों के पदों को समाप्त कर उसी के एवज में नवीन परियोजना हेतु समस्त स्वीकृतियां प्राप्त कर उसके स्थान पे नवीन इकाई जॉइंट वेंचर कम्पनी के माध्यम से स्थापित की जाएगी, जिसमे पांच वर्षों उपरान्त के कार्मिकों को न रख कर, कम्पनी स्वयं की भर्तियाँ स्वत: करेगी, जोकि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 उल्लंघन होगा ।
उपरोक्त के अतिरिक्त श्री दुबे द्वारा बताया गया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिसन कंपनी लिमिटेड में लगातार सब-स्टेसन और ट्रांसमीसन लाइनों को टी.बी.सी.बी. जिससे ट्रांसमिसन कंपनी की के माध्यमों से निजी हाथों मे दिया जा रहा है अधोसंरचना मे लगातार गिरावट हो रही है। विदयुत कर्मियों के समस्त सेवानिवृत्ति लाभों के निष्पादन की प्रतिबद्धता राज्य शासन द्वारा अधिसूचित ट्रांसफर स्कीम के अन्तर्गत म.प्रपावर ट्रांसमिशन कंपनी को सौंपी गयी है। जबकि पारेषण कंपनी शासन के निर्देशानुसार हर साल सारांश को वितरण कंपनी का राइटआफ कर रहा है। यह अत्यंत आवश्यक है कि सभी विदयुत कंपनियों को माननीय नियामक आयोग द्वारा निर्धारित विदयुत दरों के अनुसार भुगतान प्राप्त हो ताकि वे सुदृढ आर्थिक आधार पर कार्य करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके।
श्री दुबे द्वारा यह भी बताया गया कि संसद का मानसून सत्र 17 जुलाई से प्रारम्भ होने जा रहा है, जिसमे सरकार बिजली (संशोधन) विधेयक पर विचार कर सकती है, जिसका उद्देश्य डिस्कॉम को कुछ शुल्कों के भुगतान पर उसी क्षेत्र में काम करने वाली अन्य सभी डिस्कॉम को अपने नेटवर्क तक गैर-भेदभावपूर्ण खुली पहुंच प्रदान करने के लिए बाध्य करना है। विधेयक में कहा गया है कि एक ही क्षेत्र के लिए कई लाइसेंस दिए जाने पर, राज्य सरकार एक क्रॉस-सब्सिडी बैलेंसिंग फंड स्थापित करेगी, जिसका उपयोग उसी क्षेत्र या किसी अन्य क्षेत्र में अन्य डिस्कॉम के लिए क्रॉस-सब्सिडी में घाटे को वित्तपोषित करने के लिए किया जाएगा।
उपरोक्त के अतिरिक्त श्री दुबे द्वारा कहा गया कि मध्य प्रदेश के विद्युत विभाग के समस्त कार्मिकों कि विभिन्न मांगे जैसा कि एक ही विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर दो पे-मैट्रिक्स परिलिक्षित करना, यह अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण है चूँकि ऐसा पुरे देश में कहीं नहीं है और यह समान-कार्य-समान-वेतन कि अवोधारणा के विरुद्ध है, अत: O3* को तत्काल विलोपित किया जाए, साथ ही हिमाचल, राजेस्थान, छातिश्गढ़, झारखंड एवं अन्य राज्यों की भांति ओल्ड पेंशन मध्य प्रदेश में भी बहाल कि जाये एवं विद्युत विभाग के समस्त कार्मिकों की पेंशन कि गारंटी मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान कि जाये, इसके अतिरिक्त बीजेपी सरकार के वर्ष 2013 के संकल्प पत्र अनुसार समस्त संविदा कर्मियों को नियमित किया जाये साथ ही बाह स्त्रोत के कर्मचारियों की सेवा शर्तें सुरक्षित कर उन्हें 20 लाख का सुरक्षा बीमा प्रदान किया जाये, विद्युत विभाग कि समस्त उत्तरवर्ती कंपनियों के संगठनात्मक संरचना अनुमोदित की जाएँ जिससे रिक्त पदों पे नवीन भर्तियाँ कि जा सकें एवं रिक्त पड़े वरिष्ठ पदों पे वरिष्ठता के आधार पे प्रभार दिया जा सके, बरसों से लंबित फ्रिंज बेनिफिट जैसे नाईट शिफ्ट अलाउंस, सि. ऑफ , एच.आर.ए आदि को पुनरीक्षित किया जाए, 50% विद्युत भुक्तान में छूट नियुक्ति के दौरान परिलिक्षित कंडिका अनुसार समस्त कार्मिकों को प्रदान कि जाये।
उक्त अनुसार, चेयरमैन: आल इंडिया पॉवर इंजिनिर्स फेडरेसन अभियंता संघ के मंच से माननीय मुख्य मंत्री: मध्य प्रदेश शासन से अनुरोध करता हूँ कि मध्य प्रदेश के उत्तरोत्तर विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विद्युत विभाग की उत्तरवर्ती कंपनियों के अस्तित्व को ध्यान मे रखते हुए प्रदेश के उपभोक्ताओ और कर्मियों के हित मे निर्णय लिया जाए, उनकी जायज मांगों को समय रहते पूर्ण किया जाये एवं जनरेशन कंपनी मे होने जा रहे ज्वाइंट वेंचर पे तत्काल रोक लगाई जाये, साथ ही ट्रांसमीसन कंपनी मे टी.बी.सी.बी. को रोकते हुए मध्य प्रदेश के उर्जा विभाग की उत्तरवर्ती कंपनियों के पूर्ण स्वामित्व में अधोसंरचना विकषित कि जाए ।



