पाटन नगर परिषद बना भ्रष्टाचार का अड्डा,कमीशन के चक्कर में भूल जाते हैं जिम्मेदारी

जबलपुर दर्पण संवाददाता/मनीष श्रीवास रिपोर्ट। जबलपुर जिले के पाटन तहशील की नगर परिषद का विवादो से पुराना नाता रहा है। यहाँ जो भी अधीकारी आते हैं,उनका उद्देश्य सिर्फ पैसा कामना होता है। सरकार,सांसद,विधायक,मंत्री या उनके जनप्रतिनिधि चाहे कितना ही अच्छा काम क्यो न करे लेकिन सरकार के कर्मचारी ही सरकार के दुश्मन बने हुए है। इनकी कितनी भी शिकायत करो कुछ नही होता है। क्योकि भ्रष्टाचार के साम्राज्य की जड़ें बहुत गहरी है। इनको इतने आसानी से हिला पाना मुश्किल है।ऐसा ही मामला हाल ही मे सामने आया है ।एक शासकीय हाई स्कूल की सी सी रोड़ मेहता ठेकेदार द्वारा बनाई गई थी ।इस सी सी रोड पर विद्यार्थियों का पैदल एवं साइकिल से आना जाना होता है। एवं हाईस्कूल में पढ़ाने वाले टीचर अपनी टू व्हीलर गाड़ी से स्कूल आना जाना करते है।ये हाई स्कूल की सी सी रोड पर ना के बराबर ट्रैफिक है। पर समय सीमा के पहले ही रोड़ मे गड्ढे हो गये। जब मीडिया मे यह मामला आया तो 10-15 दिन पहले 1इंची गुट्टी की लेयर सी सी रोड पर डाल कर ठेकेदार के द्वारा सी सी रोड की मरम्मत कर दी गई है। और जो कार्य अभी ठेकेदार के द्वारा किया गया है। उसमे भी गड्ढे दिखने लगे है। अब साईया भय कोतवाल तो डर कहे का, यह कहावत नगर परिषद पाटन पर फिट बैठती है। इंजीनियर साहब की मेहरबानी के चलते ठेकेदार को आर्थिक रूप से अत्यधिक लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही है। निर्माण के दौरान इंजीनियर के द्वारा सीसी रोड का साईड,निरीक्षण नहीं किया जाता है। जिसके फल स्वरुप ठेकेदार के द्वारा घटिया निर्माण करके एवं इंजीनियर के द्वारा बिल का पूर्ण भुगतान कर दिया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदार और इंजीनियर,के व्यापारिक संबंध है। इसलिए इसकी फार्म के बिलो मे किसी प्रकार की कटौती नहीं होती है। और ना ही इस फर्म के द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण करने कोई अधिकारी जाता है। ठेकेदार के द्वारा विगत 3 वर्षों में पाटन नगर परिषद के अंतर्गत करोड़ों अरबों रुपए के काम किए गए हैं। और सारे के सारे काम घटिया क्वालिटी के किये गये हैं। इन लोगों के कारण कोई दूसरा ठेकेदार पाटन मे काम नही कर पाता है। यदि किसी ने काम ले भी लिया तो इंजीनियर नगर परिषद पाटन के द्वारा ठेकेदार को हद से ज्यादा परेशांन किया जाता है। इसके कारण ठेकेदार या तो काम छोड़ कर चला जाता है। या फिर अच्छे काम करने वाले ठेकेदार पाटन नगर परिषद में काम नही करना चाहते है। यदि जिला प्रशासन के द्वारा उक्त ठेकेदार और इंजीनियर के द्वारा विगत 3 वर्ष मे किये गये कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते है। एवं प्रशासन को चाहिए विगत 3 वर्षों में किए गए कार्यों की जांच करे और उन कार्यो की आज क्या स्थिति दर्शा रही है। एवं सभी कार्यो के मेज़ारमेंट की भी जाँच होना अति आवश्यक हैं । तभी पता चल सकेगा की धरातल पर कितना काम किया गया है।और भुगतान कितने का किया गया है। प्रशासन को चाहिए इंजीनियर के द्वारा कराये गए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच करें और दोषी पाए जाने पर सभी पर कठोर कार्रवाई की जाये ।



