जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

कलेक्टर जनसुनवाई से भी नहीं हो पाई होनहार और विस्थापित बालक की मदद

 

जबलपुर दर्पण। अंतराष्ट्रीय मैथ्स ओलंपियाड एवं जिला स्तरीय योग स्पर्धा में जीत चुका है मैडल

कलेक्टर जनसुनवाई में एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें एक दस वर्षीय होनहार और विस्थापित बालक किताबें उपलब्ध कराने की गुहार लेकर पहुंचा लेकिन अधिकारी उसे किताबें उपलब्ध नहीं करा पाए। बच्चा जब अपनी मां के साथ कलेक्टर को आवेदन देना चाहा तो कोविड प्रोटोकॉल का हवाला देकर उन्हें कलेक्टर से नहीं मिलने दिया। मजबूरीवश बच्चे और उसकी मां को अपर कलेक्टर को आवेदन देना पड़ा। इस पर मदद करने की बजाय अपर कलेक्टर ने उन्हें दुत्काराते हुए यह कहकर चलता कर दिया कि हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते। इतने समझदार अधिकारियों ने जरा भी मनोवैज्ञानिक ढंग से यह नहीं सोचा कि उनके इस रूखे व्यवहार से बच्चे के मन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। अधिकारी चाहते तो रेडक्रॉस सोसायटी की तरफ बच्चे की मदद कर सकते थे।
इस संबंध में मदन महल पहाड़ी से विस्थापित बच्चे की मां रामवती बाई (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उनके पति का लॉक डाउन में काम छूट गया इसलिए वे बच्चे को किताबें नहीं दिला पाए। किताबें न होने से 1 टर्म के एग्जाम हो गए जिसका बहुत बुरा रिजल्ट और 2 टर्म के एग्जाम चल रहे हैं। इन्होंने अपने स्तर पर किताबों के लिए ख़ूब प्रयास किए लेकिन कहीं से बात नहीं बनी। अंततः किसी ने इन्हें केअर बाय कलेक्टर और जनसुनवाई में आवेदन देने की सलाह दी लेकिन वहाँ भी इन्हें निराशा हाथ लगी। इन्होंने अपर कलेक्टर विमलेश सिंह को आवेदन दिया और बताया कि बच्चे का आरटीई के तहत एडमिशन हुआ है। बावजूद इसके अपर कलेक्टर ने समस्या का समाधान करने की बजाय इनकी गरीबी और मजबूरी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जब किताबें लेने की हैसियत नहीं रहती तो इतने महंगे स्कूल पढ़ाते ही क्यों हो। जनसुनवाई कक्ष से बाहर निकलकर रामवती बाई ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा अब कोई मदद देगा भी तो मदद नहीं लेंगे बच्चा मोबाइल से ही अध्ययन कर लेगा। बच्चा भी बोला कि अपर कलेक्टर ऐसे होते है तो नहीं बनना अपर कलेक्टर भले मैं कुछ और बन जाऊं।
उल्लेखनीय है कि बच्चा एक बार अंतराष्ट्रीय मैथ्स ओलंपियाड एवं जिला स्तरीय योगा स्पर्धा में मैडल जीता है तथा आईजीके ओलंपियाड में भी बेहतर रैंक हासिल कर चुका है। खास बात एक ऐसा ही मामला शहडोल अपर कलेक्टर के सामने भी आया था और उन्होंने बाकायदा बच्चे को किताबें उपलब्ध कराई। इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर एकाउंट पर भी साझा की थी।

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