लेमा गार्डन वासियों को मिली बड़ी राहत

जबलपुर दर्पण। लेमा गार्डन आवास योजना मामले में रहवासियों को फिलहाल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक सभी पक्षों को यथा स्थिति बरकरार रखने के निर्देश नगर निगम को दिये हैं. वहीं न्यायालय ने अगली सुनवाई तक पार्टियों और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के भी आदेश दिये हैं. गौरतलब है की 8 सितम्बर को नगर निगम द्वारा लेमा गार्डन में रह रहे परिवारों को अवैध कब्जेधारी बताते हुये सात दिनों के अंदर खाली करने नोटिस जारी किया था। नोटिस के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा, शिवेन्द्र पाण्डे, वरुण तन्खा एवं शास्वत अवस्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसपर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुये माननीय न्यायाधीश अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया.
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य के विद्वान अधिवक्ता से पूछा की याचिकाकर्ताओं को इन नोटिसों को जारी करने में इतनी देरी क्यों की गई। जिसका कोई जवाब प्रतिवादी/निगम के विद्वान वकील दे पाए हैं। कोर्ट ने पूछा कलेक्टर जबलपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 11 जनवरी, जिसके द्वारा विचाराधीन संपत्तियों के अतिक्रमणकारियों की पहचान के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इसके बाद दिनांक 14 जनवरी को अपर कलेक्टर का आदेश है, जो कलेक्टर, जबलपुर द्वारा बनार्इा समिति से शीघ्रता से उन व्यक्तियों की सूची तैयार करने को कहते हैं, जिनका विचाराधीन आवासों पर अवैध कब्जा है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा की उसके बाद भी इस बात का कोई जवाब नहीं है की याचिकाकर्ता को सितम्बर में जो नोटिस भेजे गये, उन्हें पहले के समय में क्यों नहीं तैयार किया गया, आखिर आठ महिने वैससे बर्बाद हो गये. कोर्ट ने कहा प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कार्रवाई देर से की गई है और आक्षेपित नोटिस सितंबर, के महीने में जारी किए गए हैं और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ उस अवधि के दौरान कार्रवाई करने की मांग की गई है जब न्यायालय अवकाश पर है। कोर्ट ने आदेश दिया की, इन परिस्थितियों में सुनवाई की अगली तारीख तक सभी पक्षों द्वारा यथास्थिति बरकार रखी जाए. पार्टियों और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। वहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया की यह आदेश प्रतिवादी/निगम को ड्रा के माध्यम से संबंधित संपत्तियों के उचित और वैध आवंटियों की पहचान करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से नहीं रोकता है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी. इस दौरान सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता स्वपनिल गांगुली ने पक्ष रखा. वहीं नगर निगम की तरफ से अधिवक्ता अरपन जे पवार ने पक्ष रखा।



