जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

नर्मदा को चढ़ाई चार-चार चुनरिया भावों और श्रद्धा की हिलोरे ने भरे विविधता के रंग

जबलपुर दर्पण। मातु नर्मदा के उदभव में ताम्रकार वंशजों का जो आध्यात्मिक और धार्मिक योगदान है उस ऋण से उऋण होने समाज के बंधुओं का आज मां नर्मदा के पावन तट पर समागम हुआ है। मेरी इच्छा है कि राष्ट्रीय प्रादेशिक स्तर पर चुनाव सर्वसम्मति से होना चाहिए इससे आपसी सामंजस्य और भाईचारा का भाव उत्पन्न हो सके ताकि समाज का विकास हो सके। उक्तआशय के विचार श्री हैहय वंशीय क्षत्रिय ताम्रकार कसेरा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष भैयालाल ताम्रकार (भोपाल) ने गत दिवस ग्वारीघाट के अग्रवाल धर्मशाला में मध्य प्रदेश ताम्रकार महिला संगठन की प्रांतीय सभा में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ताम्रकार महिला संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष शशि का खमेले ने कहा कि आज महिलाओं को एक साथ एक मंच पर देखकर अत्यंत हर्ष और गौरव का अनुभव हो रहा है । उन्होंने कहा कि मैंने मध्यप्रदेश की महिला अध्यक्ष प्रतिभा पंडा को बनाकर अच्छा निर्णय लिया। उनके नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं प्रगति विकास के नए आयाम गढ़ेगी। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा पंडा ने मंचासीन अतिथि भैयालाल ताम्रकार, शशि खमेले, राष्ट्रीय महामंत्री प्रीति पैगवार, प्रदेश महामंत्री मुरारीलाल ताम्रकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेश ताम्रकार, राम कृष्ण ताम्रकार, सुबोध पैगवार का स्वागत प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा पंडा, प्रीति ताम्रकार, प्रमिला ताम्रकार ने किया। इस अवसर पर इंदौर, गंजबासौदा और भोपाल की महिला संगठन की पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में युवा मंडल, छात्र कल्याण संस्था, महिला संगठन की सदस्यों का सक्रिय योगदान रहा । श्रीमती प्रमिला एवं श्रीमती रमाजी का कुशल मार्गदर्शन रहा मंच संचालन श्रीमती नंदा वर्मा ने किया ।

शोभा यात्रा, नर्मदा को चार चुनरियों का समर्पण

मध्य प्रदेश ताम्रकार महिला संगठन की प्रतिभा पांडे ने बताया कि अग्रवाल धर्मशाला से अत्यंत भावपूर्ण चुनर शोभायात्रा उमा घाट पहुंची जहां गुप्तेश्वर पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी मुकुंद दास महाराज ने पूजन अर्चन के साथ चुनरिया समारोह आरंभ हुआ। इस अवसर पर डॉक्टर मुकुंद दास का शॉल श्रीफल से स्वागत किया गया। 40 नावों पर समाज की सैकड़ों बहिनों ने मैया की चुनरियों को लेकर इस छोर से उस छोर तक जाकर समर्पित की तदुपरांत सभी बहनों को प्रसाद स्वरूप चुनरियां भेंट की गई।

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