संयुक्त अधिवक्ता मंच ने विधि एवं न्याय मंत्री को लिखा पत्र

जबलपुर दर्पण भोपाल। अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र कुमार वालेजा ने किरेन रिजीजू विधि एवं न्याय मंत्री भारत सरकार दिल्ली को पत्राचार द्वारा न्यायिक व्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ आज देश की अनेक अदालतों में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। बिना किसी पक्षपात एवं द्वेष भावना से प्रेरित होकर सामान्य नागरिक को न्याय दिलाना एक अधिवक्ता की नैतिक एवं वैधानिक जिम्मेदारी है किंतु वही आज अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए चिंतित और भयभीत है देश की अनेकों अदालतों एवं न्यायालय के बाहर हमारे अधिवक्ता साथियों और उनके परिवार जनों पर हमले, बिना बिना किसी कारण के हो रहे हैं। यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस कानून की रक्षा और उसके प्रति प्रतिबद्धता रखने वाले अधिवक्ता अपने पूरे सामर्थ्य के साथ न्यायालयों में विधि संगत रूप से न्याय हेतु पैरवी करते हैं आज उन्हीं अधिवक्ताओं की स्वयं सुरक्षा हेतु कोई भी विधि संगत अधिनियम या वर्तमान अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं है। एडवोकेट एक्ट 1961 एक केंद्रीय अधिनियम है जिस की व्यापकता पूरे भारत में एक समान है। इस दिशा में अनेक राज्य सरकारों ने अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम मसौदा तैयार कर वैधानिक रूप देने की तैयारी भी कर ली है यहां तक कि भारतीय विधिक परिषद द्वारा भी अधिवक्ता कल्याण एवं सुरक्षा का मसौदा विधि मंत्रालय को उचित वैधानिक कार्यवाही हेतु तैयार कर सौंपा गया है।
देश की न्यायालयों में कार्यरत अधिवक्ता साथ ही जिस तरह एकजुट होकर भारतीय संविधान के प्रति अपना दायित्व रखते हैं उसी तरह अधिवक्ता कहीं भी व्यवसायरत हो उसकी सुरक्षा और कल्याण सभी जगह एक समान सुनिश्चित करना भी भारत सरकार की जिम्मेदारी और दायित्व है।
पत्र के माध्यम से अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए विधि एवं न्याय मंत्रालय से यह मांग करता है कि दिनांक 29 नवम्बर से प्रारंभ हुई शीतकालीन संसदीय सत्र में ही अधिवक्ता सुरक्षा एवं कल्याण बिल प्रस्तुत प्रस्तावित कर लागू कराने हेतु सकारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृपा करें।



