कोई भी बीमारी, चैतन्य की शक्ति से ठीक हो सकती हैं

जबलपुर दर्पण। पृथ्वी की चालना, इतनी सुन्दर व्यवस्था है, सूर्य का हमारा अंतस का रखना, पूरी ही व्यवस्था इतनी कमाल की है कि इस स्थिति में कोई न कोई जरूर जादूगर है, फिर आप अपनी ही ओर देख सकते हैं कि इस हृदय की चालना करने वाले, इस हृदय को चलाने वाले कौन हैं, उसका प्रकृति नाम दीजिए, उसको आप परमात्मा कहें अपनी भाषा में, कुछ भी कहें लेकिन अपने अंदर में ऐसा विश्व व्यापी आत्मा है जिसको वो वूनीवर्सल अनकाशिस कहते हैं, हमें वो संभालता है।” “परमात्मा ने तीन शक्तियों को उपयोग में लाया, एक शक्ति संहारक शक्ति और दूसरी शक्ति सृजन शक्ति है। आप अगर एक छोटा सा परमाणु ले लेंगे तो उसमें आप आश्चर्यचकित होंगे कि एक सल्फर के अंदर से कैसा अनुकंपन आ रहा है, हालांकि वो बिजली जैसा इलेक्ट्रॉनिक लेकिन उसको कौन वहां चला रहा है, उस एक छोटे से परमाणु में उस चीज को कौन चला रहा है, उस अणु रेणु में कौन कंपित है, गर मैं यहाँ बोलूं नहीं तो आपके पास कोई आवाज नहीं आने वाली, उस छोटे से अणु परमाणु में वही शक्ति काम कर रही है जिसने सारी सृष्टि को चलाती है, जो सोचती है, समझती है और सब चीज से अनुशासित है। तीसरी शक्ति उत्क्रांति की शक्ति है, जिस शक्ति के कारण मनुष्य इस चेतनामय दशा में आ गया।” 16 फरवरी 1975 मुम्बई दिए प्रवचन से साभार। सहजायोगा डॉटओआरजी डॉटइन के माध्यम से भी उपरोक्त कही गई वाणी को चेतन्य में अनुभव कर स्वास्थ्य लाभ पाया जा सकता है। अनेक लोगों ने इसका लाभ लिया है। आम बोलचाल में इसे आशीर्वाद या चमत्कार भी कह सकते हैं।



