प्रेरणा

जबलपुर दर्पण। जिंदगी में बहुत उतार चढ़ाव आते हैं पर जिसे बचपन से ही कष्ट हो जाए वह नियति के सामने क्या कर सकता है ऐसे ही दिनेश धुर्वे करौंदी कुंडम डिंडौरी 25 साल के युवा जो नवमी कक्षा तक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई छोड़ दी और मेहनत मजदूरी कर अपना गुजर बसर कर रहे हैं व घर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
दिनेश धुर्वे का एक हाथ बचपन से ही काम का नही है फिर भी वे कठिन परिश्रम कर रहे हैं जो कि प्रेरणादायक है। लोग कहते है कि हौसला है तो सब कुछ है और उसे इस युवक ने चरितार्थ कर दिया है।
इस युवक के लिए वैसे तो बहुत से कवियों ने लिखा है पर कवयित्री सुशील राठौड़ तारानगर राजस्थान की ये पंक्तियां दिल को छू गई…..
क्या हुआ जो मेरा एक हाथ नहीं है,
इंसानियत अभी जिंदा है मरी नहीं है।
खड़ा मेरे संग हाथ से हाथ मिला मेरा भाई,
मिलकर कर लेंगे जो ठाना हौसलें मरे नहीं है।



