साहित्य दर्पण
-
कविता ॥ अहम ॥
जिनके मन में अहम का है . आयालुट गई है उनकी तिलिस्म का सायारावण कंस की इतिहास को पढ़नामन के…
Read More » -
रद्दी तक तोली जाती है
जबलपुर दर्पण। आदमी को अहं में कभी मदहोश नहीं होना चाहिये । यह ऐसा धीमा जहर होता है जो स्वयं…
Read More » -
कभी न खोएँ आपा
जबलपुर दर्पण। कभी – कभी जीवन में ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि मानव कोई कारण विशेष से या कर्मों…
Read More » -
मंजिल कहां मुश्किल हैं
खुद ने खुद को जाना,खुद ही को प्यार किया।तुमने कहां पहचाना,यों ही ऐतबार किया। जलती है यह दुनिया,हंसती है ये…
Read More » -
बदली-बदली सी हवा
चारो तरफ ये कैसी हवा चल रही हैबरसात में ये धरती सुखी लग रही हैफूलों में खुशबू अब कम होने…
Read More » -
शुभ कर्म ही पूजा है
जबलपुर दर्पण। छिंद” का अर्थ खजूर-ताड़ के पेड़ों से भरा और “वाड़ा” का अर्थ स्थान होता है। छिंदवाड़ा छिंद से…
Read More » -
गिद्ध
वो दूर किसी टहनी में बैठकर निगाह रखते बारीकी से मौका की ताक में रहते पल दिवस तारिखी से मसौदा…
Read More » -
किलकारियां से विलाप तक का सफर
जबलपुर दर्पण। ग्रामांचल निवार पहाड़ी के प्रतिष्टित शिक्षक कुंजी लाल दुबे श्रीमती सीता दुबे का घर आंगन खुशियों से किलकारियां…
Read More » -
जिन्दगी का सफ़र
जबलपुर दर्पण। मानव के जन्मरूपी प्रथम स्टेशन से लेकर मृत्यु रूपी अन्तिम स्टेशन के बीच न जाने ज़िन्दगीरूपी सफ़र में…
Read More » -
यादें
एक समय था जो अक्सर,बहुत याद आता हैकल्पनाओं में मेरा मन,अक्सर खो जाता हैपड़ोस का घर भी जैसे,अपना सा लगता…
Read More »









