अर्पण समर्पण आस्था श्रद्धा की मिशाल बना समर्थ सद्गुरु का संकल्प

जबलपुर दर्पण। गुप्त हो रही मां नर्मदा, दम तोड़ रही सहायक नदियां, विलुप्त हो रही नर्मदांचल की असधारण वनस्पतियां पेड़ पौधे को बचाने अभी तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक कदम बना। देश दुनियां के अनेक स्थानों पर देववृक्षों की स्थापना के साथ भाव पूर्ण श्रद्धांजलि दी। विगत 596 दिनों से अनवरत नर्मदा धरा प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन के लिए निराहार सत्याग्रह महाव्रत कर रहे परम तपस्वी समर्थ सद्गुरु भैयाजी सरकार दादागुरु ने विश्व पर्यावरण दिवस पर जननी को भाव पूर्ण श्रद्धा सुमन करते हुए राष्ट्र के हृदय नगर संस्कारधानी पुण्य सलिला के पावन तट तिलवारा तीर्थ क्षेत्र स्थित स्नेह वृन्दा नर्सरी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में दादाभक्त प्रेमियों को संदेश देते हुए कहा- मां है जिसने जन्म दिया,माँ है जिसने जीवन दिया,माँ है जिसने जीना सिखाया,माँ है जिसने आत्मनिर्भर बनाया।जननी के रूप में जीवनदायनी पवित्र नदियों के रूप में,धरती के स्वरूप,गौ के रूप में ,प्रकृति के रूप में और हम धन्य है राष्ट्र के रूप में भी मां को देखते हैं विश्व में हम ही है जो कण कण में भगवान को देखते है,प्रकृति धरा धेनु नदियों को हम माँ कह कर बुलाते है उन्हें जीवित मानते है भारतीय सनातन हिन्दू दर्शन प्रकृति पहाड़ो नदियों को जीवित इकाई मानता है दुर्भाग्य है इस देश की प्रशासनिक व्यवस्था संवैधानिक मान्यता इसे नही मानती।अब यही वक्त है जब हम प्रकृति को जीवित इकाई मान अपनी सनातन धर्म संस्कृति को पूर्ण संरक्षित करे साथ ही केंद्र व राज्य सरकारें ठोस नीति कानून बना जीवित इकाई मान इसे संरक्षित करें।
अब वक्त है जिसे हमने मां कहा जिसने हमें सब कुछ दिया बदले में हमसे कुछ नही लिया जिससे हमारा जीवन ,हमारा अस्तित्व ,हमारी पहचान है आओ मिलकर उस प्रकृति स्वरूपा धरा नर्मदा स्वरूपा माँ के सम्मान में ,सेवा में अपना दायित्व अपना कर्तव्य निभाए चलो माँ से रिश्ता निभाए।
अभी अपना योगदान देकर श्रद्धा के पुष्प चढ़ाए यही सही मायनों में माँ के प्रति सच्ची पुष्पांजलि श्रद्धांजलि होगी।
विगत 596 दिनों से अखंड निराहार सत्याग्रह महाव्रत कर रहे दादागुरु समर्थ सद्गुरु ने भाव पूर्ण श्रद्धा सुमन समर्पित करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस पर अनूठी इस।सदी की एक आदर्श प्रकृतिमयी परंपरा को प्रारम्भ किया समर्थ बीजा अमृत देव अंश रोपण मातृ पितृ देव पक्ष को पूर्ण समर्पित राष्ट्र आराधना सगुण शक्ति उपासना का जीवंत उदाहरण देते हुए मातृ पक्ष को सामूहिक श्रद्धांजलि समर्पित करते हुए सम्पूर्ण नर्मदा।परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में आने वाले 21 जिलों के साथ अन्य पवित्र नदियों के क्षेत्र में समर्थ देव वृक्ष पालना घर प्रकृति धरा धेनु केंद्रित जीवन शैली व्यवस्था और विकास की परिकल्पना को साकार करने स्वच्छ भारत समर्थ भारत के निर्माण में अपना योगदान देने प्राण प्रण से संकल्पित हुए।
विश्व पर्यावरण दिवस पर सम्पूर्ण नर्मदा।तीर्थ क्षेत्र व देश दुनियां के अनेक स्थानों पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि भक्त मंडल परिवार ने दी।



